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राज्य/जिलावाराणसी

मन उदास तो चंद्रमा से है कनेक्शन, जानें कुंडली का शुभ-अशुभ


पं अभुलेंद्र दूबे की कलम से
मोः 6388403618

वाराणसी। ग्रहों में सूर्य को राजा कहा गया है तो चंद्रमा को माता। कुंडली में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। कहते हैं मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। जाहिर है कुंडली में चंद्रमा यदि मजबूत स्थिति में है तो जातक विकट से विकट परिस्थिति में भी हार नहीं मनता और संघर्ष करता रहता है तथा अंत में जीत जाता है। वहीं कुंडली में चंदमा यदि कमजोर हो तो जातक छोटी मोटी समस्या आने पर भी तुरंत टूट जाता है। सब कुछ होते हुए भी मन से दुखी रहता है। अक्सर आत्महत्या के मामले में देखा गया कि जातक की कुंडली में चंद्रमा कहीं न कहीं से पीड़ित था। चंद्रमा वृषभ में उच्च और वृश्चिक में नीच का होता है। आइए जानते हैं कुंडली के 12 भावों में चंद्रमा का शुभ-अशुभ परिणाम।

लग्न में चंद्रमा
कुंडली के पहले घर यानि लग्न में चंद्रमा हो तो जातक तन मन से बलवान, सुखी, व्यवसायी, गायन वाद्य प्रिय एवं स्थूल शरीर का तथा ऐश्वर्य का प्राप्त करने वाला होता है तथा ताउम्र कल्पनाओं में जीने वाला होता है। यहां से सातवें भाव को देखने से जातक का जीवन साथी सौम्य स्वभाव का सुंदर और चंचल होता है। जातक व्यापार में तरक्की करता है।

दूसरे भाव में चंद्रमा
दूसरे भाव में चंद्रमा जातक को मधुरभाषी, सुंदर, भोगी, परदेश में वास करने वाला, सहनशील और शांति प्रिय बनाता है। अगर यहां स्वग्रही और उच्च का चंद्रमा हो और कहीं से पीडित न हो तो जातक को अतुल धन संपदा का मालिक बनाता है। यहां से आठवें भाव को देखने से जातक को सर्दी संबंधित बीमारी लगी रहती है।

तीसरे भाव में चंद्रमा

कुंडली में तीसरे भाव में अगर चंद्रमा विराजमान हो तो जातक अपने पराक्रम से धन प्राप्ति करता है। वह यशस्वी, प्रसन्न, आस्तिक एवं मधुरभाषी होता है। जातक अपनी छोटी बहन से खास लगाव रहता है। यहां नौवें भाव को देखने से जातक का भाग्य प्रबल हो जाता है। नौंवा भाव यदि मित्र राशि का हो तो यह ज्यादा कारगर सिद्ध होता है।

चाौथे भाव में चंद्रमा
चाौथा भाव भूमि, भवन, वाहन और माता का कारक होता है। यदि यहां चंद्र बलवान स्थिति में हो तो जातक दानी, मानी, सुखी, उदार, रोगरहित, सदाचारी, सट्टे से धन कमाने वाला एवं क्षमाशील होता है। अन्यथा की स्थिति में इसके प्रभाव में कमी आ जाती है। यहां से दसवें घर को देखने से जातक कर्मशील होता है और व्यापार और तंत्रमंत्र के क्षेत्र में क्रियाशील रहता है।

पांचवें भाव में चंद्रमा
कुंडली के पांचवें घर में चंद्र बैठा हो तो जातक प्रबल बुद्धि का मालिक होता है वह चंचल, सदाचारी, क्षमावान तथा शौकीन होता है। पढाई के दौरान वह परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त करता है। जातक चित्रकारी और संगित कलाओं में भी रुचि रखने वाला होता है। यहां से ग्यारहें भाव को देखने से जातक को अपनी आय में काफी उतार चढ़ाव का सामना करना पड़़ता है।

छठें भाव में चंद्रमा
कुंडली के छठें भाव में चंद्रमा हो तो जातक को कफ रोगी, नेत्र रोगी, अल्पायु, आसक्त बना देता है। ऐसा जातक धन का भी अपव्यय करता है। देखा गया है कि ऐसा जातक फेफड़े के किसी न किसी रोग से पीड़ित रहता है। यहां से बारहवें भाव को देखने से जातक अपने धन को लड़कियों और पूजा पाठ में ज्याद खर्च करता है। ऐसे जात के शत्रु स्वयं नष्ट हो जाते हैं।

सातवें भाव में चंद्रमा
चंद्रमा सातवें भाव में हो तो जातक व्यापारी, वकील, स्फूर्तिवान, सभ्य, धैर्यवान, नेता, विचारक, प्रवासी, जलयात्रा करने वाला और अभिमानी होता है। जातक का जीवन साथी सुंदर और सौम्य होता है। यहां से लग्न को देखने से जातक को चंद्रमा चंचल, सुंदर विचारशील बनाता है। कभी कभी ऐसे जातक लेखन के क्षेत्र में काफी नाम पैदा करते हैं।

आठवें भाव में चंद्रमा
कुंडली में आठवें भाव में चंद्रमा होने से जातक कामी, व्यापार से लाभ वाला, वाचाल, स्वाभिमानी, बंधन से दुखी होने वाला एवं ईर्ष्यालु तथा विकारग्रस्त होता है। जातक अक्सर मन से दुखी रहता है। वह अपने दुख से कम दूसरों के सुख से ज्यादा दुखी रहता है। यहां से दूसरे भाव को देखने से जातक अपने धन को स्थिर रखने में नाकाम साबित होता है।

नौवें भाव में चंद्रमा

जातक की कुंडली में नौंवे भाव में चंद्रमा होने से जातक धर्म कार्य में रुचि रखने वाला, संपत्तिवान, धर्मात्मा, कार्यशील, प्रवास प्रिय, न्यायी, विद्वान एवं साहसी होता है। ऐसे जातक का भाग्य हमेशा आगे बढ़ता रहता है। चंदमा के यहां से तीसरे भाव को देखने से जातक को अपने छोटे भाई बहनों से ज्यादा लगाव रहता है।

दसवें भाव में चंद्रमा

जातक की कुंडली में चंद्रमा यदि दसवें भाव में हो तो जातक कार्य कुशल, दयालु, संतोषी एवं लोकहितैषी, निर्मल बुद्धि, व्यापारी और यशस्वी होता है। चित्रकारी से भी उसे विशेष लगाव रहता है। यहां से चैथे भाव को देखने से जातक को अपनी माता से विशेष लगाव रहता है। जातक अपनी कार्य कुशलता से घर व वाहन बनाता है।

ग्यारहवें भाव में चंद्रमा
कुंडली के ग्यारहवें भाव में चंद्रमा होने से जातक यशस्वी, दीर्घायु, परदेशप्रिय एवं राज्यकार्य में दक्ष, चंचल बुद्धि, गुणी, संतति एवं संपत्ति से युक्त होता है। यहां चंद्रमा उच्च का हो तो जातक को कभी धन की कमी नहीं होती है अगर नीच को हो तो भी जातक को धन की मामले में ज्यादा कमजोर नहीं करता हैं। जातक अपनी बुद्धि से अपनी गाड़ी खींच ले जाता है।

बारहवें भाव में चंद्रमा
जिस जातक की कुंडली में चंद्रमा बारहवें भाव में चंद्रमा पड़ा होता है ऐसा जातक एकांत प्रिय, चिंतनशील, मृदुभाषी एवं अधिक व्यय करने वाला तथा नेत्र रोगी, कफ रोगी व क्रोधी होता है। यहां से छठें भाव को देखने से ऐसा जातक बिना किसी वजह के भी दुश्मिनों को बढ़ता रहता है। ऐसा जातक अक्सर कोर्ट कचहरी के चक्कर में परेशान रहता है।

नोट-कुंडली में खराब व पीड़ित चंद्रमा को ठीक करने के लिए शिव लिंग पर सोमवार को दूध मिला जल चढ़ाएं तथा ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः का दस हजार जप करें। सफेद वस्त्र, मोती तथा चांदी दान करें।

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