
चंदौली। उत्तर प्रदेश में मिशन 2027 की राजनीतिक हलचल अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है। चंदौली जिले की चारों विधानसभा सीटों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और संभावित दावेदार अपने-अपने स्तर पर सक्रियता बढ़ाने में जुट गए हैं। इनमें 380 मुगलसराय विधानसभा सीट सबसे अधिक चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के भीतर टिकट को लेकर कई चेहरे सक्रिय नजर आ रहे हैं। मौजूदा विधायक के अलावा पार्टी के अन्य नेता भी क्षेत्र में जनसंपर्क और राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाकर अपनी दावेदारी मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे भाजपा खेमे में चुनावी माहौल पहले से ही बनता दिखाई दे रहा है।
वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस की तरफ से अब तक कोई स्पष्ट उम्मीदवार या मजबूत दावेदार खुलकर सामने नहीं आया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि विपक्षी दल अभी उपयुक्त उम्मीदवार की तलाश में हैं या फिर संभावित चेहरे सही समय का इंतजार कर रहे हैं।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रमेश जायसवाल ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार चंद्रशेखर यादव को पराजित कर जीत हासिल की थी। चुनाव के बाद से क्षेत्रीय राजनीति में भाजपा की सक्रियता लगातार बनी रही, जबकि विपक्ष अपेक्षाकृत शांत दिखाई दिया।
स्थानीय राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा के पूर्व प्रत्याशी चंद्रशेखर यादव चुनाव के बाद क्षेत्र में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पाए हैं। हालांकि पूर्व सांसद एवं पूर्व विधायक रामकिशुन यादव समय-समय पर जनता के बीच नजर आते रहे हैं, लेकिन उन्होंने भी अभी तक आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब भाजपा के कई नेता चुनावी तैयारी में जुटे हुए हैं, तब सपा, बसपा और कांग्रेस की ओर से मुगलसराय विधानसभा सीट पर आखिर कौन सा चेहरा सामने आएगा। मिशन 2027 की तैयारियों के बीच विपक्ष की यह खामोशी आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और चर्चाओं का प्रमुख विषय बन सकती है।

