
चंदौली। चंद्रप्रभा वन क्षेत्र में अवैध पत्थर खनन का कारोबार बदस्तूर जारी है। भदहंवा, ललमनिया, गिधवा, कोठी, गणेशपुर समेत कई पहाड़ी क्षेत्रों में आरक्षित वन भूमि पर खुलेआम तथाकथित सफेद पोश पत्थर खनन कर और करा रहे हैं, लेकिन विभागीय जिम्मेदार चुप्पी साधे बैठे हैं।
आखिर किसकी शह पर चल रहा यह खेल?
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खनन माफिया वन विभाग के ही कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह धंधा चला रहे हैं। गांव वालों के मुताबिक, दिन हो या रात अवैध खनन मे लगे वाहनों का बिना किसी रोक-टोक के आवाजाही लगी रहती है। और पहाड़ियों से पत्थरों का तोड़ान रात के अंधेरे में नहीं बल्कि दिनदहाड़े होता है। और यह सब प्रक्रियाएं साबित करती है कि संबंधित विभाग वन संपदा को संरक्षण करने में कितना अप्रभावी होता जा रहा है। इसमें पूर्व जिला पंचायत सदस्य महेंद्र राव की भूमिका सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों की माने तो इनकी पूरी कमाई पत्थर खनन पर ही आधारित है। हालांकि पुलिस की ओर से पूर्व जिला पंचायत सदस्य के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। पुलिस की माने तो पूर्व जिला पंचायत सदस्य के खिलाफ अब तक एक दर्जन से अधिक मुकदमे पंजीकृत किए गए हैं।
शिकायत करो तो कार्रवाई नहीं, उल्टे धमकियां मिलती हैं-
यह कहना है ललमनिया पहाड़ी के निकट के रहने वाले एक बुजुर्ग ग्रामीण का, जिनका कहना है कि कई बार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन हर बार जांच की बात कहकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया।
कागज़ों पर जंगल सुरक्षित, ज़मीनी हकीकत में चरमरा रहा है-
सरकार के दस्तावेजों में ये पहाड़ियां आरक्षित वन भूमि घोषित हैं, लेकिन हकीकत में इन पर अब जंगल नहीं, खनन माफियाओं का कब्जा है। लगातार हो रहे पत्थर खनन से न सिर्फ पर्यावरणीय असंतुलन गहराया है, बल्कि वन्यजीवों का जीवन भी संकट में आ गया है।
“कौन है असली दोषी?”जनता का सवाल सीधा है –
जब खनन वाहन गांवों के रास्ते दिन-रात गुजर रहे हैं तो क्या वन रक्षक और अधिकारी उन्हें नहीं देख पा रहे? क्या विभाग की चुप्पी, मिलीभगत की गवाही नहीं दे रही?
अब देखना यह है कि विभाग अपने ऊपर लगे आरोपों पर चुप्पी तोड़ता है या फिर यह खामोशी ही माफियाओं के साथ उसकी साझेदारी की पुष्टि करती है। पर्यावरण प्रेमियों ने मांग किया है कि खनन में विभागीय संलिप्तता कि उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
अवैध खनन की जानकारी नहीं है. अगर ऐसा हो रहा है तो. जल्द ही कार्रवाई कर अवैध खनन पर लगाम लगाया जाएगा। अखिलेश दुबे. वन क्षेत्र अधिकारी चंद्रप्रभा।

