
भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि परंपरा, सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। शादी-ब्याह से लेकर भविष्य की बचत तक, भारतीय परिवारों में सोने का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोगों से “कुछ समय तक सोना खरीदने से बचने” की अपील की चर्चा सामने आई, तो यह सवाल उठने लगा कि आखिर इसके पीछे सरकार की सोच क्या है।
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ और LTP Calculator के आविष्कारक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने इस विषय को सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ सोने की खरीद का नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़ा हुआ है।
डॉ. तिवारी के अनुसार वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में तनाव बढ़ रहा है। विशेष रूप से Iran–Israel जैसे संघर्षों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसके साथ ही भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातक देशों में भी शामिल है। ऐसे में तेल और सोना दोनों के लिए भारी मात्रा में डॉलर खर्च होते हैं।
उन्होंने बताया कि जब देश से ज्यादा डॉलर बाहर जाते हैं, तो विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) पर दबाव बढ़ता है। इसका सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ता है। रुपया कमजोर होने से महंगाई बढ़ती है और आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री का संदेश वास्तव में “आर्थिक अनुशासन” का संकेत है। सरकार चाहती है कि कठिन वैश्विक परिस्थितियों में देश का पैसा उत्पादक क्षेत्रों में निवेश हो, न कि केवल लॉकरों में बंद सोने के रूप में पड़ा रहे। यदि लोग कुछ समय तक सोने की खरीद कम करें, तो इससे देश का Import Bill नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में खरीदा गया अधिकांश Physical Gold अर्थव्यवस्था में सक्रिय रूप से उपयोग नहीं होता। जबकि वही पैसा उद्योग, व्यापार, स्टार्टअप, म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार जैसे क्षेत्रों में लगाया जाए, तो रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
डॉ. तिवारी के मुताबिक सरकार भविष्य में लोगों को Physical Gold की बजाय Sovereign Gold Bond, Gold ETF और अन्य वित्तीय विकल्पों की ओर प्रोत्साहित कर सकती है, ताकि लोगों की बचत सुरक्षित भी रहे और आयात का दबाव भी कम हो।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी का संदेश “सोना खराब है” कहना नहीं था, बल्कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच अनावश्यक आयात कम करने का संकेत था।
डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने कहा कि भारत में सोना भावनात्मक संपत्ति भी है, इसलिए इसकी मांग पूरी तरह समाप्त होना संभव नहीं है। शादी-ब्याह और पारंपरिक आयोजनों में इसकी भूमिका आगे भी बनी रहेगी। हालांकि आने वाले समय में सरकार “समझदारी से और सीमित मात्रा में” सोने में निवेश करने की सलाह दे सकती है।

