
चंदौली। सोशल मीडिया पर वायरल होकर चर्चा में आए बांझपन के इलाज का दावा करने वाले चंदौली जिला मुख्यालय के एक चिकित्सक की सच्चाई अब धीरे-धीरे सामने आने लगी है। जिन लोगों ने इलाज के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए, वे अब अपेक्षित परिणाम न मिलने पर खुलकर अपनी आपबीती साझा कर रहे हैं। आरोप है कि यह पूरा खेल प्रेगनेंसी किट में फर्जी तरीके से “पॉजिटिव” रिपोर्ट दिखाकर मरीजों को भ्रमित करने का है।
कैसे किया जाता है प्रेगनेंसी किट पर “पॉजिटिव” का खेल
विशेषज्ञ चिकित्सकों के मुताबिक, प्रेगनेंसी किट में परिणाम ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (HCG) हार्मोन के स्तर पर निर्भर करता है। सामान्य स्थिति में गर्भधारण होने पर यह हार्मोन बढ़ता है, जिससे किट में पॉजिटिव परिणाम दिखाई देता है।
हालांकि कुछ दवाओं और इंजेक्शनों के जरिए कृत्रिम रूप से HCG का स्तर बढ़ा दिया जाता है। इससे प्रेगनेंसी किट में पॉजिटिव रिपोर्ट दिखती है, जबकि वास्तव में महिला गर्भवती नहीं होती। कुछ समय बाद जब हार्मोन का स्तर सामान्य हो जाता है, तो रिपोर्ट फिर निगेटिव आ जाती है।
इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे डॉक्टर
बांझपन की समस्या से जूझ रहे मरीजों को पहले “सफल इलाज” का भरोसा दिलाया जाता है तीन से छह महीने के दवाओं के कोर्स और जांच के नाम पर उनसे बड़ी रकम वसूली जाती है। जब वास्तविकता सामने आती है, तब तक मरीज आर्थिक और मानसिक रूप से नुकसान झेल चुका होता है।
प्रशासन की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल
मरीजों से खुलेआम लूट का खेल स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहा है। BAMS डॉक्टर खुद को स्त्री एवं प्रसूति तथा बांझपन रोग विशेषज्ञ बताता है जो नियमों के अनुसार पूरी तरह से गलत है। अस्पताल में मरीजों से दुर्व्यवहार और मारपीट के मामले भी सामने आ चुके हैं। बावजूद इसके, अब तक किसी ठोस कार्रवाई का अभाव प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
जांच की मांग तेज
हाल ही में एक युवक के साथ मारपीट के मामले की जांच जारी है। वहीं, पीड़ितों की संख्या बढ़ने के साथ अब इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

