
डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने AI के बढ़ते चलन और 80’s फोटो ट्रेंड को बताया बड़े बदलाव की शुरुआत
चंदौली। इन दिनों सोशल मीडिया पर 80 के दशक की शैली में तैयार की गई तस्वीरों का ट्रेंड तेजी से लोगों को आकर्षित कर रहा है। AI की मदद से लोग अपने वर्तमान रूप को 80’s के अंदाज में बदलकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। किसी तस्वीर में उम्र कम दिखाई दे रही है तो किसी में घने बाल और फिट शरीर नजर आ रहा है। इस ट्रेंड को डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आम लोगों तक AI की पहुंच बढ़ने का संकेत बताया है।
डॉ. तिवारी के अनुसार शुरुआत में ऐसी तस्वीरें सेलिब्रिटीज और नेताओं के बीच लोकप्रिय हुईं। इसके बाद इन्फ्लुएंसर्स और अब आम लोग भी AI के इस प्रयोग से जुड़ गए हैं। उनका मानना है कि भविष्य में AI के इतिहास में यह दौर इस बात के लिए याद किया जा सकता है कि आम आदमी ने AI का इस्तेमाल किसी जटिल काम से पहले खुद को अलग-अलग रूपों में देखने के लिए किया।
उन्होंने कहा कि 80’s की तस्वीर बनवाने के पीछे लोगों की जिज्ञासा भी दिलचस्प है। हर कोई यह देखना चाहता है कि अगर वह उस दौर में जवान होता, तो कैसा दिखाई देता। इसी बहाने AI मोबाइल से होते हुए आम आदमी की सोच और रोजमर्रा की जिंदगी तक पहुंच रहा है।
डॉ. तिवारी ने तकनीकी बदलावों का उदाहरण देते हुए कहा कि चिट्ठी से PCO, लैंडलाइन, पेजर और मोबाइल तक का सफर हुआ। बड़े कंप्यूटर छोटे होकर लैपटॉप और टैबलेट बने। इंटरनेट, एंड्रॉयड, सोशल मीडिया और रील्स भी धीरे-धीरे जीवन का हिस्सा बन गए। शुरुआत में हर नई तकनीक को लेकर लोगों में झिझक रही, लेकिन बाद में इन्हीं तकनीकों ने जीवन और काम करने के तरीके बदल दिए।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को AI से दूर करने के बजाय उन्हें इसका सही और जिम्मेदार इस्तेमाल सिखाएं। उनका कहना है कि यदि आज बच्चों को AI सीखने से रोक दिया गया तो भविष्य में वे तकनीकी बदलावों से पीछे रह सकते हैं। इसलिए समय की जरूरत है कि AI को समझा जाए, सीखा जाए और रचनात्मक व उपयोगी कार्यों में इस्तेमाल किया जाए।
डॉ. विनय प्रकाश तिवारी
Founder – Daddy’s International School
Founder – LTP Calculator

