
चंदौली। पुरुषों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके साथ होने वाले कथित उत्पीड़न के मामलों को लेकर युवा संघर्ष मोर्चा ने प्रधानमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन प्रशासन को सौंपते हुए देश में पुरुष आयोग के गठन की मांग की। संगठन का कहना है कि वर्तमान समय में पुरुषों से जुड़े मामलों के लिए भी एक स्वतंत्र संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता है, ताकि उनकी शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई हो सके।
युवा संघर्ष मोर्चा के संयोजक एवं अधिवक्ता शैलेंद्र पांडे ‘कवि’ ने कहा कि हाल के वर्षों में वैवाहिक विवादों, घरेलू कलह और अन्य पारिवारिक मामलों में पुरुषों के साथ कथित उत्पीड़न के कई मामले सामने आए हैं। उनका दावा है कि कुछ मामलों में पुरुषों पर झूठे मुकदमे दर्ज कराए जाते हैं, जिससे उन्हें मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते तनाव और पारिवारिक विवादों के कारण कई पुरुष मानसिक अवसाद का शिकार हो रहे हैं तथा आत्महत्या जैसी घटनाओं में भी वृद्धि देखने को मिल रही है। उनका कहना था कि समाज और परिवार की अनेक जिम्मेदारियां निभाने वाले पुरुषों के पास अपनी समस्याओं को रखने और न्याय पाने के लिए कोई अलग मंच उपलब्ध नहीं है।
शैलेंद्र पांडे ने मांग की कि बदलते सामाजिक परिवेश को देखते हुए केंद्र सरकार को पुरुषों की समस्याओं के अध्ययन, शिकायतों के समाधान और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरुष आयोग का गठन करना चाहिए। उनका कहना था कि ऐसा आयोग पारिवारिक विवादों और पुरुषों से जुड़े मामलों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने में सहायक हो सकता है। ज्ञापन सौंपने वालों में मदन सिंह पांडे, ईश्वरचंद्र पांडे, अरुण पाठक, सुमित सोनकर सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

