ख़बरेंचंदौली

Chandauli News: बारिश में ढहा 60 वर्षीय मजदूर का कच्चा मकान, मलबे में दबी गृहस्थी, आवास योजना का लाभ न मिलने का आरोप

संवाददाता – बाबू चौहान

चंदौली। लगातार मूसलाधार बारिश गरीब परिवारों के लिए आफत बन गई। चकिया विकासखंड के केराडीह गांव में बारिश के दौरान 60 वर्षीय मजदूर जयप्रकाश का कच्चा मकान भरभराकर गिर गया। हादसे में घर में रखा अनाज, कपड़े, बिस्तर, घरेलू सामान और खाने-पीने की सामग्री मलबे में दब गई। मकान गिरने के बाद परिवार के सामने रहने के साथ ही भोजन का भी संकट खड़ा हो गया है। गरीब परिवार के सामने अब गुजारे का संकट का खड़ा हो गया है।

 

केराडीह निवासी जयप्रकाश मिट्टी के कच्चे मकान में परिवार के साथ रहते थे। पीड़ित के अनुसार, 2 सितंबर को लगातार हुई बारिश के दौरान अचानक उनका मकान ढह गया। देखते ही देखते वर्षों से परिवार का आशियाना रहा मकान मलबे में तब्दील हो गया। इसके बाद परिवार खुले में अथवा दूसरों के सहारे रहने को मजबूर है।

जयप्रकाश ने बताया कि घर में रखा राशन, कपड़े, बिस्तर और अन्य जरूरी सामान मलबे में दब गया। वह मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। उनका कहना है कि मकान गिरने के बाद दो वक्त के भोजन का इंतजाम करना भी मुश्किल हो गया है। परिवार को दूसरों के घर से खाना मांगकर गुजारा करने की नौबत आ गई है।

 

आवास योजना का लाभ नहीं मिलने का आरोप

पीड़ित के परिवार में दो बेटे हैं। जयप्रकाश का कहना है कि आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह खुद पक्का मकान बनवा सकें। ऐसे में सरकारी आवास योजना उनके परिवार के लिए बड़ी मदद साबित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान से लेकर चकिया विकासखंड और जिला स्तर तक अपनी समस्या की जानकारी देने के बावजूद उन्हें अब तक सरकारी आवास का लाभ नहीं मिला।

 

जयप्रकाश का यह भी आरोप है कि बारिश से प्रभावित लोगों की जांच के लिए अधिकारी-कर्मचारी गांव में पहुंचे, लेकिन उनकी स्थिति पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। उनके अनुसार, हाल में लेखपाल सुभाष सिंह प्रभावित लोगों की जांच के लिए पहुंचे थे। आसपास के घरों में जांच की गई, लेकिन उनके मकान की स्थिति देखने के लिए कर्मचारी नहीं पहुंचे।

 

लेखपाल ने कहा, पहले मिल चुका है मुआवजा

इस संबंध में लेखपाल सुभाष सिंह से फोन पर जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि जयप्रकाश को पूर्व वर्ष में भी मुआवजा दिलाया जा चुका है। हालांकि, वर्तमान में मकान गिरने के बाद परिवार को आवास अथवा अन्य सरकारी सहायता की आवश्यकता है या नहीं, इसकी मौके पर जांच और पात्रता का निर्धारण प्रशासनिक स्तर से किया जाना बाकी है। वहीं, चकिया विकासखंड अधिकारी से मामले में जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। लिहाजा उनका पक्ष खबर में शामिल नहीं किया जा सका।

 

मौके की तस्वीरें परिवार की बदहाली साफ बयां कर रही हैं। अब सवाल है कि मकान गिरने के बाद खुले आसमान के नीचे पहुंचे इस गरीब परिवार की प्रशासन कब सुध लेता है और क्या पात्रता के आधार पर उसे आवास व तत्काल राहत उपलब्ध कराई जाएगी। पीड़ित द्वारा लगाए गए अनदेखी के आरोपों की वास्तविकता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

 

Back to top button
error: Content is protected !!