
चंदौली। ऑनलाइन साइबर ठगी और म्यूल बैंक खातों के जरिए धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में अलीनगर पुलिस और साइबर सेल को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त टीम ने देशभर में साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों के नेटवर्क से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के तार 16 राज्यों तक फैले हैं। चिह्नित 17 म्यूल खातों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 76 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें करीब 29 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है।
पुलिस ने 10 अगस्त की रात चकिया तिराहे के पास संदिग्धों की तलाश के दौरान सूचना मिलने पर मुगलसराय स्थित वीआईपी गेट, डीआरएम कार्यालय के पास दबिश देकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान बिहार के नवादा जिले के वारिस अलीगंज थाना क्षेत्र निवासी नीतीश कुमार और चंदौली के सकलडीहा कोट निवासी अमन शर्मा के रूप में हुई है। आरोपियों के कब्जे से आठ बैंक खाता विवरण दस्तावेज, पांच पासबुक, एक चेकबुक, छह डेबिट कार्ड, छह सिम कार्ड, दो कूटरचित आधार कार्ड, तीन स्मार्टफोन और 650 रुपये नकद बरामद किए गए।
पुलिस के अनुसार, बरामद बैंकिंग दस्तावेजों और NCRP पोर्टल के मिलान में कुल 7,20,725 रुपये की साइबर ठगी से संबंधित लेन-देन का विवरण मिला है। पुलिस जांच में नीतीश के पास मिले आठ बैंक खाता दस्तावेजों से करीब 3,97,477 रुपये की साइबर ठगी का संबंध सामने आया। इन खातों का इस्तेमाल ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात और चंडीगढ़ सहित विभिन्न राज्यों में लोन फ्रॉड, डिलीवरी फ्रॉड और यूपीआई धोखाधड़ी की रकम मंगाने में किए जाने की जानकारी मिली है। वहीं, अमन के पास मिले पांच बैंक खातों और चेकबुक से करीब 3,23,248 रुपये की साइबर ठगी का विवरण मिला है। एक खाते के खिलाफ गाजीपुर, तमिलनाडु और कर्नाटक में आठ साइबर शिकायतें भी दर्ज मिलीं।
जांच में दोनों के पास से कूटरचित आधार कार्ड भी बरामद हुए। पुलिस के मुताबिक, इन दस्तावेजों में आरोपियों की तस्वीर लगी थी, जबकि नाम और पता दूसरे व्यक्तियों का दर्ज था। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पहचान छिपाने और पुलिस से बचने के लिए ऐसे एडिटेड आधार कार्ड इस्तेमाल किए जाते थे। पुलिस के अनुसार, अमन शर्मा लोगों को बैंक खाते खुलवाने के लिए तैयार करता था और पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड व सिम हासिल करता था। इसके बाद नीतीश इन बैंकिंग सामग्रियों को बिहार निवासी सोनू सिंह तक पहुंचाता था। पुलिस का कहना है कि इसी नेटवर्क के जरिए बजाज फाइनेंस के नाम पर लोन, ऑनलाइन डिलीवरी, फेसबुक विज्ञापन, पार्ट-टाइम जॉब और निवेश का झांसा देकर लोगों से साइबर ठगी की जा रही थी।
इस मामले में अलीनगर थाने में बीएनएस की संबंधित धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। गिरोह के फरार आरोपी सोनू सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम प्रयासरत है। इससे पहले 10 अगस्त को चंदौली पुलिस और साइबर सेल ने इसी तरह के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

