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Chandauli News: सपा नेता महेंद्र राव को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर रोक, न्यायालय ने एफआईआर पर उठाए सवाल

 चंदौली। चकिया थाना क्षेत्र में दर्ज आपराधिक मुकदमे में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाजवादी पार्टी के नेता महेंद्र राव उर्फ महेंद्र कुमार राव तथा अन्य याचिकाकर्ताओं को बड़ी अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण करने के बाद याचिकाकर्ताओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अदालत का यह आदेश अगली सुनवाई या चार्जशीट दाखिल होने तक प्रभावी रहेगा, जो भी पहले हो।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों और एफआईआर में लगाए गए आरोपों का अवलोकन किया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई ठोस आधार नहीं दिखाई देता, जिससे तत्काल कठोर कार्रवाई को उचित ठहराया जा सके।

खंडपीठ ने यह भी उल्लेख किया कि एफआईआर में 21 नामजद व्यक्तियों के साथ लगभग 100 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। अदालत के अनुसार, आरोपों का स्वरूप काफी सामान्य और अस्पष्ट प्रतीत होता है तथा उनमें विशिष्ट तथ्यों का पर्याप्त उल्लेख नहीं है। न्यायालय ने यह भी माना कि याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत तर्कों में यह कहा गया है कि मामले में लगाए गए आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर और काल्पनिक रूप से प्रस्तुत किया गया है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई गंभीर चिकित्सकीय या अन्य प्रत्यक्ष साक्ष्य तत्काल दृष्टिगत नहीं हो रहा है, जिससे आरोपों की गंभीरता का स्पष्ट समर्थन मिलता हो। इसी आधार पर न्यायालय ने अंतरिम राहत देने का निर्णय लिया।

राज्य सरकार की ओर से मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया, जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने दो सप्ताह का समय प्रदान किया। वहीं याचिकाकर्ताओं को राज्य के जवाब पर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ताओं को जांच में पूरा सहयोग करना होगा। यदि वे जांच प्रक्रिया में सहयोग करते हैं, तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी या किसी अन्य प्रकार की जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि चकिया थाने में दर्ज इस मुकदमे में भारतीय वन अधिनियम, 1927, क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट, 1932 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई थी। हाईकोर्ट के इस फैसले को महेंद्र राव और अन्य याचिकाकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

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