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Chandauli News: मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जिला संयुक्त चिकित्सालय में जागरुकता कार्यक्रम, विशेषज्ञों ने तनाव और अवसाद के प्रति किया सचेत

चंदौली। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शनिवार को पंडित कमलापति त्रिपाठी जिला संयुक्त चिकित्सालय में यथार्थ नर्सिंग कॉलेज एंड पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट के बीएससी नर्सिंग पंचम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व से अवगत कराना, मानसिक बीमारियों से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना और मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

 

कार्यक्रम में एमडी मनोचिकित्सक डॉ. नितेश सिंह, साइकियाट्रिक नर्स ममता कश्यप और काउंसलर अजय उपस्थित रहे। कॉलेज की फैकल्टी सदस्य गजाला, नाजमीन, विजयलक्ष्मी और शमा सहित नर्सिंग के छात्र-छात्राओं ने भी सहभागिता की। इस दौरान अस्पताल में उपचार कराने आए मरीजों और उनके तीमारदारों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया।

 

डॉ. नितेश सिंह ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समग्र स्वास्थ्य का अभिन्न अंग है। जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित देखभाल और स्वस्थ जीवनशैली जरूरी है, उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य के लिए भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक दिनचर्या भी आवश्यक है। मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति दैनिक चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना करने के साथ परिवार और समाज के साथ अच्छे संबंध बनाए रख सकता है।

 

उन्होंने बताया कि काम का दबाव, पारिवारिक समस्याएं, आर्थिक परेशानियां, पढ़ाई का तनाव और बदलती जीवनशैली मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। तनाव, चिंता, अवसाद और नींद संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। सामाजिक संकोच या लोगों की प्रतिक्रिया के डर से मानसिक परेशानी छिपाना उचित नहीं है।

 

डॉ. सिंह ने कहा कि मानसिक बीमारी कमजोरी नहीं है और न ही इससे प्रभावित व्यक्ति को समाज से अलग समझना चाहिए। उचित मूल्यांकन, परामर्श और उपचार से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का प्रबंधन किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसे व्यक्तियों की बातें ध्यानपूर्वक सुनें, उन्हें भावनात्मक सहयोग दें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करें।

विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि परीक्षा, करियर और भविष्य की चिंता से तनाव बढ़ सकता है। इससे बचने के लिए समय प्रबंधन, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित दिनचर्या अपनाना जरूरी है।

 

कार्यक्रम में नर्सिंग और परामर्श सेवाओं की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। विद्यार्थियों ने संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। परिवार का सहयोग, समाज का सकारात्मक दृष्टिकोण और समय पर उपचार एक स्वस्थ एवं संवेदनशील समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

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