
चंदौली। कृषि विभाग ने जनपद के सभी लाइसेंसधारी कीटनाशी विक्रेताओं के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से कीटनाशकों की बिक्री को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रभारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार यादव ने बताया कि अमेज़न, फ्लिपकार्ट, मीशो, जियोमार्ट सहित अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कीटनाशकों का व्यापार करने वाले विक्रेताओं को भारत सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा।
उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था भारत सरकार की अधिसूचना संख्या सा.का.नि. 846 (अ), दिनांक 24 नवंबर 2022 के तहत लागू की गई है। अधिसूचना कीटनाशी नियमावली, 1971 के नियम 10 (ई) के अंतर्गत जारी की गई है, जिसमें ई-वाणिज्य इकाइयों के माध्यम से कीटनाशकों की बिक्री संबंधी प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है।
नए नियमों के अनुसार केवल वैध लाइसेंसधारी विक्रेता ही अपनी लाइसेंस अवधि के दौरान ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों और उपभोक्ताओं को कीटनाशकों की आपूर्ति कर सकेंगे। इसके तहत विक्रेता किसानों के घर तक उत्पादों की डिलीवरी कर सकते हैं, लेकिन उन्हें कीटनाशी अधिनियम, 1968 तथा कीटनाशी नियमावली, 1971 के सभी प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने कहा कि ऑनलाइन व्यापार की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए सरकार ने किसानों के हितों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण कृषि रक्षा रसायनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था लागू की है। इससे किसानों को अधिकृत स्रोतों से प्रमाणित उत्पाद प्राप्त होंगे और नकली अथवा अवैध कीटनाशकों की बिक्री पर अंकुश लगेगा।
उन्होंने सभी विक्रेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था ऑनलाइन माध्यम से अपंजीकृत, प्रतिबंधित अथवा खतरनाक श्रेणी के कीटनाशकों, खरपतवारनाशकों या अन्य कृषि रक्षा रसायनों की बिक्री करते हुए पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में कीटनाशी अधिनियम, 1968 और कीटनाशी नियमावली, 1971 की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने सहित लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई भी की जा सकती है।
कृषि विभाग ने जनपद के सभी कीटनाशी विक्रेताओं से अपील की है कि वे ऑनलाइन व्यापार के दौरान सभी वैधानिक प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों का पालन करें तथा केवल पंजीकृत एवं अनुमोदित उत्पादों की ही बिक्री करें। विभाग द्वारा समय-समय पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर की जा रही बिक्री की निगरानी भी की जाएगी, ताकि किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

