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Chandauli News : महंगी शिक्षा के खिलाफ ‘केसरिया भारत’ का संवाद अभियान, समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने की उठी मांग

चंदौली। महंगी होती शिक्षा और बढ़ती फीस के मुद्दे को लेकर सामाजिक संगठन केसरिया भारत ने रविवार को कैंट विधानसभा क्षेत्र के कोल्हुआ, विनायका स्थित माँ वैष्णो होम स्टे में ‘छात्र, अभिभावक संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया। बैठक में विद्यार्थियों, अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करते हुए शिक्षा को अधिक सुलभ, समान और किफायती बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

 

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने बढ़ती स्कूल फीस और विभिन्न शिक्षा बोर्डों के कारण उत्पन्न असमानताओं पर चिंता व्यक्त की।

केसरिया भारत के प्रमुख संयोजक कृष्णानंद पांडेय ने कहा कि देश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिसमें सभी विद्यार्थियों को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो। उन्होंने एक बोर्ड, एक फीस और एक पाठ्यक्रम” की नीति लागू करने की मांग करते हुए कहा कि इससे शिक्षा प्रणाली में समानता आएगी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने सरकार से शिक्षा को अधिक सुलभ, उत्तरदायी और जनहितकारी बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संगठन के संरक्षक रामजी सिंह ने कहा कि शिक्षा धीरे-धीरे सेवा के बजाय व्यवसाय का रूप लेती जा रही है। लगातार बढ़ती फीस और अलग-अलग शिक्षा बोर्डों की व्यवस्था के कारण सामान्य एवं मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार समय की आवश्यकता है।

 

प्रदेश अध्यक्ष गौरीश सिंह ने कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की सबसे महत्वपूर्ण पूंजी होती है। इसलिए इसे आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे के मौलिक अधिकार के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने सभी वर्गों के लिए समान और सस्ती शिक्षा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।

 

बैठक के अंत में उपस्थित विद्यार्थियों, अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने महंगी शिक्षा के खिलाफ जनजागरण अभियान को आगे बढ़ाने तथा अधिक से अधिक लोगों को इस मुहिम से जोड़ने का संकल्प लिया। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जनसमर्थन जुटाने का भी आह्वान किया।

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