
संवाददाता-बाबू चौहान
चंदौली। जनपद के शहाबगंज विकासखंड के सैकड़ों गांव इन दिनों भीषण बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। अघोषित कटौती और अनियमित आपूर्ति ने ग्रामीणों की दिनचर्या को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। एक दिन पहले ऊर्जा मंत्री एके शर्मा बनारस दौरे पर थे। वे सर्किट हाउस में अफसरों संग मीटिंग कर ट्रिपिंग रोकने की हिदायत देते रहे, लेकिन ग्रामीण इलाकों में हालात जस से तस रहे। हालात यह हैं कि दिन के साथ-साथ रात में भी घंटों बिजली गुल रहने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से 18 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। कई गांवों में मुश्किल से 4 से 5 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। तेज गर्मी के इस दौर में लगातार हो रही कटौती ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। पंखे और कूलर बंद रहने से लोगों को रातें जागकर गुजारनी पड़ रही हैं।
इस संकट का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। जिनके पास इनवर्टर, जनरेटर या सोलर पैनल जैसी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है, वे पूरी तरह बिजली पर निर्भर हैं और अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। रात में बिजली न रहने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं दिन में घरेलू कामकाज भी बाधित हो रहे हैं।
किसानों के लिए भी यह समस्या किसी आपदा से कम नहीं है। सिंचाई के लिए बिजली न मिलने से खेतों की फसल प्रभावित हो रही है। मोटर और पंप सेट न चल पाने से समय पर सिंचाई नहीं हो पा रही, जिससे उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकार और बिजली विभाग स्मार्ट मीटर और तकनीकी सुधारों की बात तो करते हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। लोगों का कहना है कि योजनाओं का प्रचार तो बड़े स्तर पर किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था चरमरा गई है।
इस संबंध में बिजली विभाग के अवर अभियंता संजीव कुमार ने बताया कि शेड्यूल के अनुसार 18 घंटे आपूर्ति का प्रावधान है, लेकिन उच्च स्तर से पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जितनी बिजली उपलब्ध हो रही है, उसी के अनुसार क्षेत्र में वितरण किया जा रहा है। उनके मुताबिक कटौती स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि ऊपर से की जा रही है।

