
- काला चावल के उत्पाद, गुलाब जामुन और लस्सी चयनित व्यंजन में शामिल
- चयनित उत्पादों से जुड़ी नई व पुरानी इकाइयों को मिलेगा वित्तीय सहयोग
- योजना के लिए एमएसएमई पोर्टल पर शुरू हुआ ऑनलाइन आवेदन
चंदौली। प्रदेश सरकार द्वारा स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘एक जनपद एक व्यंजन‘ वित्त पोषण सहायता योजना लागू की गई है। आयुक्त उद्योग ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि शासनादेश दिनांक 5 जून 2026 के तहत योजना को मंजूरी प्रदान की गई है। योजना का उद्देश्य जनपद के विशिष्ट व्यंजनों का मूल्य संवर्धन, उत्पादन क्षमता में वृद्धि, गुणवत्ता सुधार तथा बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना है।
योजना के अंतर्गत जनपद के लिए काले चावल से बने उत्पाद (जैसे खीर), गुलाब जामुन और लस्सी को चयनित व्यंजन के रूप में शामिल किया गया है। इन उत्पादों से संबंधित नई इकाइयों की स्थापना, पुरानी इकाइयों के विस्तारीकरण तथा विविधीकरण के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इच्छुक उद्यमी विभागीय पोर्टल msme.up.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
योजना के लिए निर्धारित पात्रता के अनुसार आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। इसमें किसी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं रखी गई है। योजना के तहत उद्योग, सेवा एवं व्यवसाय स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी। हालांकि, वही व्यक्ति पात्र होंगे जिन्होंने केंद्र या उत्तर प्रदेश सरकार की किसी अन्य स्वरोजगार योजना का पहले लाभ नहीं लिया हो तथा जो किसी राष्ट्रीयकृत बैंक, वित्तीय संस्था या सरकारी संस्थान के चूककर्ता (डिफॉल्टर) न हों।
योजना में परियोजना लागत के आधार पर मार्जिन मनी का प्रावधान किया गया है। 25 लाख रुपये तक की परियोजना पर परियोजना लागत का 25 प्रतिशत अथवा अधिकतम 6.25 लाख रुपये, जो भी कम हो, मार्जिन मनी मिलेगी। 25 लाख से 50 लाख रुपये तक की परियोजनाओं पर 6.25 लाख रुपये अथवा परियोजना लागत का 20 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, सहायता दी जाएगी। 50 लाख से 1.50 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं पर 10 लाख रुपये अथवा परियोजना लागत का 10 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, मार्जिन मनी उपलब्ध होगी। वहीं 1.50 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं के लिए परियोजना लागत का 10 प्रतिशत, अधिकतम 50 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी।
उद्योग विभाग ने जिले के इच्छुक युवाओं, उद्यमियों और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े व्यवसायियों से इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है। विभाग का कहना है कि यह योजना स्थानीय व्यंजनों को नई पहचान देने के साथ रोजगार सृजन और स्वरोजगार को भी बढ़ावा देगी।

