
चंदौली। कृषि प्रधान जनपद में गेहूं खरीद व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरती नजर आ रही है। किसानों का आरोप है कि अधिकांश सरकारी क्रय केंद्रों पर सप्ताह में केवल दो दिन ही खरीदारी की जा रही है, जबकि बाकी दिनों में बोरा, संसाधन और माल उठान की समस्या बताकर उन्हें वापस लौटा दिया जाता है। इससे किसानों के सामने भारी संकट खड़ा हो गया है और हजारों क्विंटल गेहूं अब भी उनके घरों और खलिहानों में पड़ा हुआ है।
किसानों का कहना है कि मार्केटिंग विभाग समेत कई एजेंसियों के क्रय केंद्रों की स्थिति बेहद खराब है। कहीं बोरे की कमी है तो कहीं काटा और सिलाई मशीन उपलब्ध नहीं है। कई केंद्रों पर गेहूं खरीद तो कर लिया गया, लेकिन समय से माल का उठान नहीं होने के कारण नई खरीद बंद कर दी गई है। इससे किसानों को कई दिनों तक केंद्रों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
नदरा गांव के किसान सत्यप्रकाश पाठक, महिला किसान अनीता पठक, फेसड़ा के किसान उधम सिंह, अंबिका सिंह, नरैना की किसान प्रतिमा पांडेय, बेचई पांडेय, कसवड़ गांव के किसान सच्चिदानंद उपाध्याय, अनूप उपाध्याय, अरूण उपाध्याय ने आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा कागजों में खरीद का लक्ष्य पूरा दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। किसानों ने बताया कि केंद्र प्रभारी हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर खरीद टाल देते हैं। इससे किसानों को मजबूर होकर औने-पौने दामों पर गेहूं व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है।
मामले की शिकायत मिलने के बाद डिप्टी आरएमओ ने केंद्र प्रभारियों से बात कर समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। वहीं समस्या के चलते किसानों में आक्रोश गहराता जा रहा है। किसानों ने शीघ्र समस्या का समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

