
चंदौली। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शहाबगंज में तैनात एक वार्ड बॉय का परिवार पिछले दो महीने से जर्जर सरकारी आवास में जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर है। हैरानी की बात यह है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के निर्देश जारी होने के बावजूद अब तक न तो भवन का निरीक्षण कराया गया और न ही मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया। बरसात के मौसम में भवन की स्थिति और अधिक खतरनाक हो गई है, जिससे परिवार हर समय भय के साये में जीवन व्यतीत कर रहा है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शहाबगंज में कार्यरत वार्ड बॉय हरिद्वार प्रसाद को आवंटित सरकारी आवास 13 मई 2026 को आए चक्रवाती तूफान के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया था। आवास के समीप खड़ा एक बड़ा आम का पेड़ तेज आंधी में गिरकर भवन पर आ गिरा, जिससे मकान की छत को गंभीर नुकसान पहुंचा। घटना के बाद हरिद्वार प्रसाद ने 21 मई को मुख्य चिकित्सा अधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर भवन की जर्जर स्थिति से अवगत कराया और परिवार की सुरक्षा को देखते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
मामले को गंभीर मानते हुए सीएमओ ने भवन का निरीक्षण कराने और मरम्मत की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे। साथ ही, मरम्मत कार्य पूरा होने तक किराये के मकान में रहने की अनुमति भी प्रदान की गई थी। बावजूद इसके, दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही भवन की स्थिति का आकलन किया गया।
हरिद्वार प्रसाद का कहना है कि आवास की छत में कई स्थानों पर बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। जगह-जगह से सरिया बाहर दिखाई दे रही है और छत का प्लास्टर लगातार टूटकर गिर रहा है। बरसात शुरू होने के बाद स्थिति और चिंताजनक हो गई है। छत से पानी टपकने के कारण कमरों में सीलन भर गई है और भवन किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है। उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों के साथ परिवार को हर दिन डर के माहौल में रहना पड़ रहा है।

मामले में जब दोबारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पारितोष मिश्रा से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि पुनः प्रार्थना पत्र उपलब्ध करा दिया जाए, जिसके बाद आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि इस जवाब के बाद यह सवाल उठने लगा है कि जब पहले ही आवेदन पर आदेश जारी हो चुके थे, तो दोबारा आवेदन की जरूरत क्यों पड़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत या वैकल्पिक आवास की व्यवस्था नहीं की गई और कोई दुर्घटना हो गई, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी। फिलहाल वार्ड बॉय का परिवार असुरक्षित भवन में रहने को विवश है और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।

