
संयुक्त किसान मोर्चा ने एडीएम को सौंपा मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र, 53 गांवों के किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग
चंदौली। विंध्य एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। बुधवार को संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में किसानों ने परियोजना के लिए जमीन देने से इनकार करते हुए जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया। किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित मांगपत्र अपर जिलाधिकारी को सौंपकर अपनी समस्याओं के समाधान की मांग की। मोर्चा ने चेतावनी दी कि जब तक किसानों की मांगों पर निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
संयुक्त किसान मोर्चा के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन ने किसानों की समस्याओं पर एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आश्वासन दिया था, लेकिन लगभग दो महीने बीत जाने के बाद भी कोई सूचना नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन किसानों की समस्याओं पर मौन है और उनके साथ वादाखिलाफी की जा रही है। ऐसी स्थिति में किसानों के पास धरना-प्रदर्शन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
53 गांवों के किसान प्रभावित होने का दावा
मोर्चा के पदाधिकारियों ने बताया कि विंध्य एक्सप्रेसवे के विरोध में जिले के लगभग 53 गांवों में पदयात्रा निकाली गई। किसानों के अनुसार, जिले में करीब 35 किलोमीटर लंबाई में 120 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित है। इससे बड़ी संख्या में किसानों की जमीन प्रभावित होने और उनके भूमिहीन होने की आशंका है।
किसानों ने आरोप लगाया कि परियोजना के लिए ड्रोन से सर्वे कराया गया, लेकिन इसमें जिला प्रशासन का सहयोग नहीं लिया गया। सर्वे के बाद तैयार किए गए नक्शे और भूमि के चिह्नांकन में भी त्रुटियां होने की बात कही गई।
नए सिरे से सर्वे कराने की मांग
किसानों ने बताया कि इस संबंध में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के साथ वार्ता हुई थी। उनके मुताबिक, वार्ता के दौरान नए विकल्प तलाशने और दोबारा चिह्नांकन के लिए बोर्ड गठित करने की आवश्यकता स्वीकार की गई थी। किसानों ने सवाल उठाया कि अब तक बोर्ड का गठन क्यों नहीं किया गया। मोर्चा ने कथित जबरन भूमि अधिग्रहण और बेदखली की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। किसानों ने स्पष्ट किया कि जमीन संबंधी समस्याओं का समाधान होने तक विरोध जारी रहेगा।
प्रदर्शन में अशोक सिंह, रामनारायण यादव, संतोष यादव, आलोक सिंह, विद्या विनय शंकर कुशवाहा, चंद्रिका, जोखन, वीरेंद्र मास्टर, गुरदयाल यादव, बाबूलाल यादव, शमशेर चौहान, राम आश्रय, वीरेंद्र यादव और परमहंस समेत अन्य किसान मौजूद रहे।

