
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में सपा का दबदबा बरकरार, शिक्षक और स्नातक दोनों सीटों पर दोहराई जीत; चंदौली के छह जनप्रतिनिधियों के प्रभाव और सक्रियता पर चर्चा तेज
चंदौली। वाराणसी खंड शिक्षक और स्नातक विधान परिषद चुनाव में भाजपा को लगातार दूसरी बार करारा झटका लगा है। समाजवादी पार्टी ने दोनों सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखते हुए शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव और स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा की जीत दोहराई है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सपा इस नतीजे को अपने लिए राजनीतिक ऊर्जा और कार्यकर्ताओं के मनोबल में बढ़ोतरी के रूप में देख रही है।
इस चुनाव परिणाम की चर्चा इसलिए भी तेज है, क्योंकि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। भाजपा के लिए यह नतीजा केवल दो सीटों की हार नहीं, बल्कि अपने प्रभाव क्षेत्र में संगठनात्मक पकड़ और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता पर मंथन का अवसर भी है।
चंदौली के संदर्भ में देखें तो यहां से जुड़े आधा दर्जन जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। इनमें दो राज्यसभा सांसद, तीन विधायक और एक कैबिनेट मंत्री शामिल हैं। इतने जनप्रतिनिधियों के होने के बावजूद स्नातक चुनाव में मतदान प्रतिशत करीब 43 फीसदी रहना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह भी है कि क्या भाजपा अपने प्रभाव और संसाधनों को मतदाताओं तक पहुंचाने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी?
चर्चा का एक अहम पहलू यह भी है कि इन जनप्रतिनिधियों में कुछ ऐसे हैं, जो स्वयं स्नातक मतदाता नहीं हैं। हालांकि, चुनाव में उनकी भूमिका का आकलन केवल उनकी व्यक्तिगत मतदाता पात्रता से नहीं, बल्कि संगठन को सक्रिय करने और मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने की क्षमता से किया जाना चाहिए।
लगातार दूसरी बार दोनों सीटों पर सपा की जीत भाजपा के लिए आत्ममंथन का संकेत है। कम मतदान प्रतिशत को सीधे तौर पर जनप्रतिनिधियों की घटती लोकप्रियता का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा, लेकिन नतीजों ने उनकी राजनीतिक सक्रियता, मतदाताओं से संपर्क और संगठनात्मक रणनीति पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि भाजपा इस झटके से सबक लेकर आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपनी रणनीति में क्या बदलाव करती है।

