
चंदौली। जिले के चकिया और शहाबगंज क्षेत्र इन दिनों भीषण गर्मी के साथ गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। एक तरफ हीटवेव के चलते तापमान 45 सेल्सियस तक पहुंच गया है, वहीं दूसरी ओर लगातार हो रही बिजली कटौती ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। ग्रामीण और नगर पंचायत क्षेत्रों में लोग दिन-रात बिजली संकट से परेशान हैं और अब उनका गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है।
क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग की लापरवाही के कारण इस भीषण गर्मी में लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि कई-कई घंटों तक बिजली गायब रहती है, जबकि सप्लाई केवल कुछ मिनटों के लिए दी जाती है। ऐसे हालात में घरों में रहना तक मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, छोटे कारोबारी परेशान हैं और खेती-किसानी का काम भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
चकिया और शहाबगंज विद्युत उपकेंद्रों से वनांचल और ग्रामीण इलाकों के सैकड़ों गांवों को बिजली आपूर्ति की जाती है। इनमें शहाबगंज, इलिया, मुबारकपुर, हिनौती, अलीपुर, अमांव, रोहाखी, भोड़सर, भूसी, केरायगांव, सारींगपुर, बिलासपुर, पहाड़पुर, शेरपुर, ठेकहा, राममाड़ो, बड़ौरा और केराडीह समेत कई गांव शामिल हैं। लेकिन इन सभी क्षेत्रों में लगातार हो रही अघोषित कटौती से लोगों में भारी नाराजगी है।
ग्रामीणों ने बताया कि दिन में लोग पेड़ों की छांव में बैठकर गर्मी से राहत पाने की कोशिश करते हैं, जबकि रात में उमस और बिजली कटौती के कारण हालात और भी खराब हो जाते हैं। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। डिहाइड्रेशन और गर्मी से जुड़ी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
क्षेत्रीय निवासी धर्मेंद्र चौहान, प्रेम केसरी, गौतम, रमेश, सोनू, अजीत, लवकुश और कमलेश सहित अन्य लोगों ने कहा कि “हर घर बिजली” और “स्मार्ट व्यवस्था” के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। लोगों ने सरकार और बिजली विभाग से तत्काल राहत देने की मांग की है।
वहीं चकिया विद्युत उपकेंद्र के एसडीओ संतोष कुमार ने बताया कि बिजली कटौती स्थानीय स्तर से नहीं, बल्कि लखनऊ कंट्रोल से की जा रही है। इसी संबंध में अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार ने भी कहा कि पूर्वांचल की बिजली व्यवस्था का नियंत्रण लखनऊ से संचालित होता है और फिलहाल कटौती पर स्थानीय स्तर पर कोई नियंत्रण नहीं है। अब लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस भीषण गर्मी में उन्हें निर्बाध बिजली कब मिलेगी और सरकार इस गंभीर समस्या पर ठोस कदम कब उठाएगी।

