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राज्य/जिलावाराणसी

भारतीय अर्थव्यवस्था को भी बीमार बना रहा मानसिक तनाव, जानिए एक्सपर्ट की राय

वाराणसी। सीधे सपाट लहजों में कहें तो मानसिक तनाव भारतीय अर्थ व्यवस्था को भी बीमार बना रहा है। वैसे भी कोविड 19 ने तकरीबन सभी को मानसिक रूप से प्रभावित किया है। इंडियन साइकियाट्रिक सर्वे के अनुसार लाकडाउन के साथ ही मानसिक बीमारियों के मामले में 20 फीसद की वृद्धि हुई है। नतीजा यह कि उद्यम और रोजगार पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। वर्ष 2019-20 में लगभग आठ करोड़ उद्यमी थे जो अप्रैल 2020 में घटकर छह करोड़ हो गए। इसी अनुरूप औसत रोजगार भी 40 करोड़ से घटकर 28 करोड़ पर आ गया।


जानिए मानसिक तनाव को लेकर क्या है एक्सपर्ट की राय
Hopequre.com के संस्थापक और कार्यकारी अधिकारी विवेक सागर कहते हैं कि आमतौर पर उद्य़मियों, व्यवसायियों और स्टार्ट अप संस्थापकों के खुद का स्वास्थ्य एक ऐसा विषय है जिसे आमतौर पर वे नजरअंदाज करते हैं। कारण इनकी जीवनशैली इतनी व्यस्त रहती है कि खुद के स्वास्थ्य के अलावा भी कई समस्याओं का समाधान करना पड़ता है। Hopequre.com के ही एमबीबीएस एमडी मनोचिकित्सक एडी गोयल बताते हैं कि वैश्विक अर्थ व्यवस्था को तनाव, अवसाद, एंग्जायटी आदि समस्याओं के चलते प्रतिवर्ष अनुमानतः एक ट्रिलियन डालर का नुकसान होता है। देश के एमएसएमई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जूझ रहे हैं और उनमें से कई खुद मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी हैै कारण कि स्वस्थ मन ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।

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