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चंदौलीप्रशासन एवं पुलिसराज्य/जिला

चंदौली पुलिस की कलंक कथा भाग-2ः भ्रष्टाचार की पोल खुलने के डर से कांस्टेबल की गलती पर परदा डालने में जुटे हुए थे सदर कोतवाल, लटकी कार्रवाई की तलवार

सदर कोतवाली के विवादित कांस्टेबल और ट्रैक्टर चालक के बीच मारपीट की घटना 13 जून की है। दो दिन पहले सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद से चंदौली पुलिस की खूब किरकिरी हो रही है। आरक्षी के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है। लेकिन सदर कोतवाली प्रभारी भी इस मामले में कम दोषी नहीं हैं।
  • भ्रष्टाचार की पोल खुलने के डर से कांस्टेबल की गलती पर परदा डालने में जुटे हुए थे सदर कोतवाल
  • भ्रष्टाचार की पोल खुलने के डर से तकरीबन एक सप्ताह से मामले को दबाए हुए थे
  • सपी डा. अनिल कुमार 25 जून को छुट्टी से वापस आ जाएंगे इसके बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई संभव

चंदौली। सदर कोतवाली के विवादित कांस्टेबल और ट्रैक्टर चालक के बीच मारपीट की घटना 13 जून की है। दो दिन पहले सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद से चंदौली पुलिस की खूब किरकिरी हो रही है। आरक्षी के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है। लेकिन सदर कोतवाली प्रभारी भी इस मामले में कम दोषी नहीं हैं। भ्रष्टाचार की पोल खुलने के डर से तकरीबन एक सप्ताह से मामले को दबाए हुए थे। पुलिसकर्मी से लबे सड़क मारपीट करने वाले चालक के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं होना इस बात का प्रमाण है कि अवैध वसूली के खेल में शामिल पुलिसकर्मियों को कलई खुलने का डर सता रहा है। एसपी डा. अनिल कुमार 25 जून को छुट्टी से वापस आ जाएंगे इसके बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई संभव है। चंदौली इंस्पेक्टर भी कार्रवाई के लपेटे में आ सकते हैं।

 

सड़क पर हुई थी सिपाही और ट्रैक्टर चालक के बीच जूतम पैजार
पिछले दिनो सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें सदर कोतवाली का कांस्टेबल और बोगा चालक सड़क पर मारपीट करते नजर आए। ट्रैक्टर चालक ने खूब हिमाकत दिखाई और मारपीट में वसूलीबाज कांस्टेबल पर भारी पड़ा। बताया जाता है कि पूरा मामला प्रतिबंधित ट्रैक्टर-बोगा से बालू की ढुलाई करने वालों से अवैध वसूली से जुड़ा है। वीडियो में बोगा चालक यह भी दावा करते हैं कि थाने पर पैसा दे दिया गया है इसलिए सिपाहियों को पैसे नहीं देंगे। बहरहाल वीडियो वायरल होने के बाद चंदौली पुलिस की खूब किरकिरी हो रही है। सीओ मुगलसराय अनिरुद्ध सिंह मामले की जांच कर रहे हैं। तीन दिन में आख्या प्रस्तुत करनी है। हालांकि पुलिस कप्तान अभी छुट्टी पर चल रहे हैं। 25 जून को काम पर वापस लौटने के बाद इस मामले में कड़ा निर्णय ले सकते हैं। इस शर्मनाक घटना में सदर कोतवाल की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। इतने बड़े मामले को दबाए हुए थे और उच्चाधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी।

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