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Chandauli News: हड़ौरा में मनरेगा कार्यों पर उठे सवाल, पक्की नाली के बीच 112 मानव-दिवस की हाजिरी दर्ज

पोर्टल पर कच्ची नाली की खुदाई के दो कार्य दर्ज, पुराने मस्टर रोल, भुगतान व निर्माण अभिलेखों की जांच जरूरी

संवाददाता-बाबू चौहान

 चंदौली। विकासखंड शहाबगंज की ग्राम पंचायत हड़ौरा में मनरेगा के तहत नाली खुदाई के कार्यों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी पोर्टल पर दर्ज ऑनलाइन अभिलेखों के अनुसार, दो अलग-अलग कार्यों के लिए कुल 12 मस्टर रोल में 112 मानव-दिवस की हाजिरी दर्ज है। वहीं, संबंधित स्थल की तस्वीरों में पक्की नाली और वर्ष 2023-24 का शिलान्यास बोर्ड दिखाई दे रहा है। ऐसे में कार्यों की वास्तविक स्थिति और पोर्टल पर दर्ज विवरण के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

 

मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि जब संबंधित स्थान पर पक्की नाली दिखाई दे रही है, तो कच्ची नाली की खुदाई का कार्य कहां और किस परिस्थिति में कराया गया? हालांकि, अभिलेखों और मौके की स्थिति का आधिकारिक सत्यापन होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

 

पोर्टल पर दर्ज हैं नाली खुदाई के दो कार्य

उपलब्ध ऑनलाइन रिकॉर्ड में राजन के खेत से रजवाहा तक तथा मुख्य सड़क से कृष्णानंद के खेत तक कच्ची नाली की खुदाई के दो कार्य दर्ज हैं। इन कार्यों के तहत मस्टर रोल संख्या 5716 से 5727 तक कुल 12 मस्टर रोल में 112 मानव-दिवस की हाजिरी दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

 

ग्रामीण संतोष, रविंद्र कुमार सहित अन्य लोगों का आरोप है कि संबंधित स्थानों पर खुदाई का कार्य होता दिखाई नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि मौके पर पहले से पक्की नाली मौजूद है। ऐसे में ग्रामीणों ने दर्ज कार्यों की वास्तविकता स्पष्ट करने और संबंधित अभिलेखों की जांच कराने की जरूरत जताई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

 

बीडीओ बोले-आज मौके पर न काम, न मजदूर

मामले में खंड विकास अधिकारी दिनेश कुमार सिंह से फोन पर संपर्क कर विभाग का पक्ष जानने का प्रयास किया गया। बीडीओ के अनुसार, मौजूदा समय में संबंधित स्थल पर न तो कोई काम हो रहा है और न ही मजदूर मौजूद हैं।

 

हालांकि, वर्तमान में काम नहीं होने की जानकारी से पुराने दिनों में दर्ज हाजिरी की स्थिति स्पष्ट नहीं होती। यह पता लगाना जरूरी है कि संबंधित अवधि में कार्य कराया गया था या नहीं और पोर्टल पर मजदूरों की उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की गई। बातचीत के दौरान पुराने रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद पक्की नाली के संबंध में अतिरिक्त जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी और फोन कट गया।

 

अभिलेखों के मिलान से स्पष्ट होगी स्थिति

मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए दोनों कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी अनुमान, मस्टर रोल, मजदूरों की उपस्थिति, भुगतान विवरण, माप पुस्तिका और जियो-टैग तस्वीरों की जांच जरूरी है। साथ ही, वर्ष 2023-24 में पक्की नाली निर्माण से संबंधित अभिलेखों का मिलान भी किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दोनों कार्यों के स्थल और उद्देश्य अलग-अलग हैं या एक ही स्थान से संबंधित हैं।

 

अब निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं। यदि निष्पक्ष जांच कराई जाती है, तो पोर्टल पर दर्ज 112 मानव-दिवस की हाजिरी, वास्तविक कार्य और मजदूरी भुगतान की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, उपलब्ध रिकॉर्ड और मौके की तस्वीरों के आधार पर उठे सवालों का जवाब संबंधित अभिलेखों के सत्यापन से ही मिल सकेगा।

 

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