
चंदौली। चहनिया क्षेत्र के लक्ष्मणगढ़ गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन संतदास जी महाराज ने पूतना वध का प्रसंग सुनाया। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े इस प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुनकर श्रद्धालु भक्ति में डूब गए। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
संतदास जी महाराज ने कहा कि कंस के कहने पर राक्षसी पूतना सुंदर स्त्री का रूप धारण कर नंद बाबा के घर पहुंची थी। उसने अपने स्तनों पर विष लगाकर बालक श्रीकृष्ण को मारने का प्रयास किया। भगवान श्रीकृष्ण ने उसके छल को पहचान लिया और दूध पीने के साथ ही उसके प्राण भी हर लिए।
उन्होंने कहा कि पूतना बाहर से सुंदर दिखाई देती थी, लेकिन उसके भीतर विष भरा था। यह प्रसंग जीवन में दिखावे और छल-कपट से बचने का संदेश देता है। भगवान श्रीकृष्ण ने पूतना को भी माता की गति प्रदान की, क्योंकि भगवान बाहरी रूप नहीं, बल्कि भाव को देखते हैं।
महाराज ने कहा कि पूतना का अर्थ उस प्रवृत्ति से भी है, जो पवित्रता का आवरण ओढ़कर भीतर से अपवित्र होती है। भगवान श्रीकृष्ण की लीला हमें सिखाती है कि मनुष्य को केवल बाहरी रूप से ही नहीं, बल्कि अपने विचारों और आचरण से भी पवित्र रहना चाहिए। जीवन में सत्य, सद्भाव और निर्मल भाव को अपनाना ही आध्यात्मिक जीवन का आधार है।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन का आनंद लिया और भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का श्रवण किया। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के क्षेत्र से आए श्रद्धालु मौजूद रहे।
इस अवसर पर उपेंद्र सिंह, बनवारी पांडे, धीरेंद्र पांडे, अखिलेश अग्रहरि, गुड्डू गिरी बाबा, विंध्याचल तिवारी, पारसनाथ मिश्र, डॉ. जितेंद्र मिश्रा, सुरेंद्र नाथ तिवारी, रामकुमार पांडे (चंदन), अम्बरीष मिश्रा, डॉ. आनंद प्रकाश मिश्रा, डॉ. राधाकांत पाठक, विजय प्रकाश मिश्रा, मंगला मिश्रा, सूबेदार सिंह, योगेंद्र पासवान, दिवाकर पांडे, प्रिंस तिवारी, बिनित पांडे, अखिलेश, माधव पांडे, आदित्य पांडे समेत बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे।

