
टोटो की किस्त और पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद के बाद पति ने घटना को दिया अंजाम
चंदौली। पत्नी की निर्मम हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-1 चंदौली की अदालत ने शुक्रवार को अभियुक्त पति को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने अभियुक्त पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पुलिस की प्रभावी पैरवी, वैज्ञानिक विवेचना और साक्ष्यों के आधार पर यह सजा सुनिश्चित हुई।
पुलिस के अनुसार, इलिया थाना क्षेत्र के सीहर गांव निवासी इजहार अली उर्फ मुन्ना ने 18 मार्च 2024 की रात करीब नौ बजे अपनी पत्नी निशा बेगम की हत्या कर दी थी। निशा ने अपने मायके और स्वयं सहायता समूह से कर्ज लेकर टोटो (ई-रिक्शा) खरीदा था। इसकी किश्त टूटने और पैसों के लेन-देन को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था। इसी बात से नाराज होकर इजहार अली ने घर का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और पत्नी के सिर व चेहरे पर ईंट-पत्थरों से ताबड़तोड़ प्रहार किए। इसके बाद गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।
घटना के बाद मृतका के भाई ने इलिया थाने में अपने बहनोई इजहार अली के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले की विवेचना के दौरान घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए और डीएनए रिपोर्ट सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की गई, जिसके आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषसिद्ध कर दिया।
अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अशोक कुमार-XI की अदालत ने इजहार अली को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। पुलिस के अनुसार, अभियुक्त को सजा दिलाने में मॉनिटरिंग सेल, अभियोजन अधिकारी संजय कुमार त्रिपाठी (एडीजीसी) और इलिया थाने के पैरोकार हेड कांस्टेबल अश्वनी राय की भूमिका सराहनीय रही।

