
संवाददाता- श्याम सिंह यादव
चंदौली। विकास खंड शहाबगंज में केराडीह माइनर किसानों के लिए सिंचाई का साधन बनने के बजाय मुसीबत का सबब बन गई है। धान और गेहूं की फसल के सीजन में माइनर की पटरी बार-बार टूटने से पानी टेल तक नहीं पहुंच पाता। नतीजतन सैकड़ों किसानों को सिंचाई के लिए महंगे डीजल से निजी बोरिंग चलानी पड़ती है। वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से नाराज किसान विकास मंच के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को सिंचाई विभाग के खिलाफ आवाज बुलंद की। किसानों ने विभाग से जल्द मरम्मत और पक्की लाइनिंग कराने की मांग की है।
लेफ्ट कर्मनाशा कैनाल से निकलने वाली केराडीह माइनर पचवनियां हेड से शुरू होती है। किसानों के मुताबिक, हेड से महज 400 से 500 मीटर पूरब पहुंचते ही माइनर की दक्षिणी पटरी बार-बार टूट जाती है। इससे पानी का बहाव बाधित हो जाता है। आरोप है कि सिंचाई विभाग के कर्मचारी हर बार मिट्टी डालकर मरम्मत की औपचारिकता पूरी कर देते हैं। दो दिन तक पानी चलने के बाद दबाव बढ़ते ही उसी स्थान पर पटरी फिर टूट जाती है।
खुद बोरी में मिट्टी भरकर कई बार बांधी पटरी
किसान विकास मंच के कार्यकर्ता महबूब आलम और मान सिंह ने बताया कि ग्रामीण दर्जनों बार खुद बोरियों में मिट्टी भरकर माइनर की पटरी बांध चुके हैं। विभागीय अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसका नतीजा है कि माइनर का पानी हेड से महज डेढ़ किलोमीटर आगे तक ही पहुंच पाता है।
तीन गांवों के किसानों की फसल पर संकट
पानी आगे नहीं पहुंचने से ठेकहा, बड़गावां और इसरौलिया गांव के सैकड़ों किसान प्रभावित हैं। माइनर के अंतिम छोर पर रहने वाले किसानों को सिंचाई के लिए एक बूंद पानी नहीं मिल पाता। संगठन मंत्री राम अवध सिंह ने कहा कि माइनर की दक्षिणी पटरी पर करीब 100 मीटर तक सीसी लाइनिंग करा दी जाए तो बार-बार पटरी टूटने की समस्या से स्थायी निजात मिल सकती है। इससे पानी अंतिम छोर तक पहुंच सकेगा।
किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता से शीघ्र पक्की लाइनिंग कराने की मांग की है। चेतावनी दी कि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो विभागीय कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान सोहराब खान, महबूब आलम, मान सिंह, सुरेश मौर्य, राम अवध सिंह, रामनरेश, इस्ताख शेख, वालिद साहब, सरोज अहमद, कमलेश गुप्ता, मंगरु राम, रामजी, चित्तू राम, बेचू, आजाद और बंधू सहित दर्जनों किसान मौजूद रहे।

