
चंदौली। चहनिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। मंगलवार रात चहनिया बाजार में भीषण आग की घटना के बाद सड़क दुर्घटना में घायल हुए एक व्यक्ति को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक अस्पताल में मौजूद नहीं थे। समय पर उपचार न मिलने के कारण घायल को निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
चहनिया बाजार स्थित एक किराना दुकान में मंगलवार रात अचानक भीषण आग लग गई। आग की लपटों ने देखते ही देखते पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। घटना की सूचना मिलने पर दुकान मालिक विजय गुप्ता मुगलसराय से चहनिया लौट रहे थे। आग में अपनी दुकान जलने की खबर से वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो गए। इसी दौरान रास्ते में उनकी बाइक अनियंत्रित होकर एक पेड़ से टकरा गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद परिजन और स्थानीय लोग उन्हें तत्काल चहनिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। आरोप है कि उस समय इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. अनुराग यादव अस्पताल में मौजूद नहीं थे। काफी देर तक डॉक्टर के नहीं पहुंचने से परिजनों की चिंता बढ़ गई। प्राथमिक उपचार नहीं मिलने पर घायल को तत्काल एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है, लेकिन जरूरत के समय डॉक्टर का अस्पताल में मौजूद न होना गंभीर लापरवाही है। उनका कहना है कि यदि समय पर इलाज मिल जाता तो घायल को निजी अस्पताल ले जाने की नौबत नहीं आती।
उधर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी ने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में ड्यूटी के दौरान चिकित्सक की अनुपस्थिति या लापरवाही की पुष्टि होती है तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) स्तर से भी मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

