
चंदौली। मुगलसराय थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने सर्विलांस की मदद से महिलाओं को नौकरी और मकान दिलाने का झांसा देकर बंधक बनाने, डराने-धमकाने और आपत्तिजनक तस्वीरों व वीडियो के नाम पर ब्लैकमेल कर धन उगाही करने वाले कथित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत तीन पुरुष और एक महिला को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से आठ मोबाइल फोन, 72,300 रुपये नकद, नौ एटीएम कार्ड, फर्जी दस्तावेज, बैंक पासबुक-चेकबुक, पोर्टेबल वाईफाई डिवाइस और दो वाहन बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, डायल-112 और एनसीआरपी पोर्टल के जरिए चंदौली क्षेत्र में इस तरह की शिकायतें सामने आ रही थीं। जांच के दौरान मुगलसराय क्षेत्र में सक्रिय एक संगठित गिरोह का पता चला। पुलिस के मुताबिक गिरोह महिलाओं को नौकरी या मकान दिलाने के बहाने बुलाकर एक मकान में ले जाता था और वहां खुद को पुलिस टीम बताकर उन्हें डराया-धमकाया जाता था। इसके बाद उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाकर परिजनों से रकम वसूलने का आरोप है।
इस मामले में 27 अगस्त को दो महिलाओं ने मुगलसराय थाने में अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई थीं। एक पीड़िता ने आरोप लगाया कि 14 मई को नौकरी दिलाने के बहाने उसे रामनगर से डहिया स्थित मकान में ले जाकर करीब दो दिन तक बंधक रखा गया। आरोप है कि वहां एक महिला ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर उसे धमकाया। परिजनों से करीब 30 हजार रुपये मंगवाने के अलावा मोबाइल के जरिए लगभग 75 हजार रुपये भी ट्रांसफर कराए गए।
दूसरी पीड़िता के मुताबिक 16 अगस्त को ऑनलाइन मकान देखने के बहाने उसे डहिया स्थित मकान में ले जाया गया। वहां उसे बंधक बनाकर वीडियो बनाने और वायरल करने की धमकी देकर पांच लाख रुपये की मांग की गई। पुलिस के अनुसार उसके खाते से फोन-पे के जरिए 1.14 लाख रुपये भी ट्रांसफर कराए गए। पीड़िता किसी तरह वहां से निकलने में सफल हुई।
विवेचना में विजय कुमार गुप्ता उर्फ संजय गुप्ता उर्फ रॉकी का नाम गिरोह के मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया। पुलिस के मुताबिक वह पहले ऑनलाइन एस्कॉर्ट सेवा से जुड़ा था। वर्ष 2023 में कथित धोखाधड़ी के बाद उसने साथियों के साथ मिलकर महिलाओं को निशाना बनाने की योजना बनाई।
28 अगस्त को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने डहिया बद्रीपुरम कॉलोनी स्थित मकान में दबिश देकर विजय कुमार गुप्ता, कृष्ण कुमार गुप्ता, विशम्भर विश्वकर्मा और अंजली गुप्ता को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार अंजली खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर महिलाओं को धमकाती थी और फर्जी दस्तावेज व बैंक खातों के जरिए रकम के लेनदेन में सहयोग करती थी।
बरामद सामान में आठ एंड्रॉइड फोन, 72,300 रुपये, नौ एटीएम कार्ड, फर्जी आधार समेत अन्य पहचान पत्र, बैंक दस्तावेज, पोर्टेबल वाईफाई डिवाइस, टॉर्चर किट, पल्सर मोटरसाइकिल और स्कूटी शामिल हैं। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमे की कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए दोनों वाहनों को सीज कर दिया है।

