
चंदौली। ओलंपियन भाला फेंक खिलाड़ी शिवपाल सिंह से जुड़े प्रकरण की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग को लेकर युवा संघर्ष मोर्चा के संयोजक शैलेंद्र पांडेय एडवोकेट ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल उठ रहे हैं और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
शैलेंद्र पांडेय ने आरोप लगाया कि बलुआ पुलिस ने मामले की गहराई से जांच किए बिना जल्दबाजी में कार्रवाई की। उनका कहना था कि शिवपाल सिंह को चहनिया चौराहे पर सार्वजनिक रूप से परेड कराकर न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जो मानवीय गरिमा और मानवाधिकारों के विपरीत है। उन्होंने इसे एक खिलाड़ी की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताया।
उन्होंने कहा कि शिवपाल सिंह केवल चंदौली ही नहीं, बल्कि पूरे देश का गौरव हैं। उन्होंने भारतीय एथलेटिक्स टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए वर्ष 2019 की एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप (दोहा) में रजत पदक जीता, वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स (चीन) में स्वर्ण पदक हासिल किया तथा 2018 के एशियन गेम्स और टोक्यो ओलंपिक-2020 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लक्ष्मण पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में उनका उल्लेख किया था।
शैलेंद्र पांडेय ने कहा कि ऐसे खिलाड़ी के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करना न केवल उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इससे युवा खिलाड़ियों का मनोबल भी प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि यदि खिलाड़ियों के साथ इस प्रकार का व्यवहार होगा तो नई पीढ़ी में गलत संदेश जाएगा और खेलों के प्रति उनका उत्साह कम हो सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों से बलुआ पुलिस की कार्यशैली को लेकर आम लोगों में असंतोष बढ़ा है। उनका कहना था कि एक ही प्रकरण में सामाजिक और न्यायिक, दोनों प्रकार का दंड दिए जाने जैसी स्थिति से जनता में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
युवा संघर्ष मोर्चा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि सभी तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल हो सके और सत्य सामने आए। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही आमजन का विश्वास कायम होगा तथा चंदौली के गौरव शिवपाल सिंह से जुड़े मामले में न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

