- 16-16 घंटे की कटौती से ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित, सिंचाई नलकूप ठप
- बिजली की दुर्व्यवस्था से सिंचाई के अभाव में धान की रोपाई पर मंडराया संकट
- तकनीकी खराबी और रोस्टरिंग के नाम पर 16-16 घंटे तक बिजली कटौती
- एसडीओ और एक्सईएन के सीयूजी नंबर पर संपर्क नहीं होने से बढ़ी नाराजगी
- मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री के 20 घंटे बिजली आपूर्ति के निर्देशों पर नहीं हो रहा अमल
- ग्रामीणों ने शीघ्र आपूर्ति सुचारू न होने पर उपकेंद्र के घेराव और उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
चंदौली। चकिया विद्युत उपकेंद्र के उतरौत फीडर की बदहाल व्यवस्था से उपभोक्ताओं का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 36 घंटों के दौरान चार बार बिजली का तार टूटने और लगातार ट्रिपिंग की समस्या से क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है। हालात ऐसे हैं कि तकनीकी खराबी और रोस्टरिंग के नाम पर ग्रामीणों को 16-16 घंटे तक बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है।
बिजली संकट का सबसे अधिक असर भीषण गर्मी के बीच आम जनजीवन पर पड़ रहा है। घरों में पेयजल की समस्या बढ़ गई है, वहीं बिजली आधारित छोटे कारोबार भी प्रभावित हो रहे हैं। दूसरी ओर धान की रोपाई के महत्वपूर्ण समय में किसानों के सामने सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। लगातार बिजली न मिलने से निजी और सरकारी नलकूप बंद पड़े हैं, जिससे खेतों में रोपाई का कार्य प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद विभागीय अधिकारी समस्या के समाधान को लेकर गंभीर नहीं हैं। एसडीओ और अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) के सीयूजी नंबर पर संपर्क करने का प्रयास भी बेनतीजा साबित हो रहा है। इससे उपभोक्ताओं में विभाग के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री का ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन 20 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है और ग्रामीण लगातार बिजली संकट झेलने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उतरौत फीडर की तकनीकी खामियों को दूर कर नियमित बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो वे चकिया विद्युत उपकेंद्र का घेराव कर उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने बिजली विभाग से तत्काल स्थायी समाधान निकालने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

