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वाह बिटिया! फौजी की दत्तक पुत्री ने दी दिवंगत मां को मुखाग्नि

 

चंदौली। श्मशान घाट पर मां की चिता को मुखाग्नि देती पुत्री। यह दृश्य दशकों में कभी कभार ही देखने और सुनने को मिलता है। उन लोगों के लिए एक सीख भी जो बेटियों को बोझ समझते हैं। खास यह कि पुत्र बनकर मां को मोक्ष प्रदान करने वाली मिनाक्षी मुंहबोली बेटी है। यह कहानी है मुगलसराय के काली महाल निवासी निवासी राजकुमारी देवी और मीनाक्षी की। राजकुमारी जिनका मंगलवार को बीमारी के चलते निधन हो गया। मिनाक्षी ने मां के पार्थिव शरीर को मुक्तिधाम में मुखाग्नि दी।

मुगलसराय क्षेत्र के रौना गांव निवासी राजकुमारी देवी के पति दयाशंकर तिवारी सेना में जवान थे। वर्ष 1990 में गांव में ही आपसी विवाद में दयाशंकर तिवारी की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। भरी जवानी में राजकुमारी विधवा हो गईं। पति की मौत के बाद राजकुमारी अपने एक वर्ष के पुत्र रंजीत के साथ मुगलसराय के काली महाल में मकान बनवाकर रहने लगीं। नियति का क्रूर खेल ऐसा कि 25 वर्षीय पुत्र रंजीत तिवारी का भी बीमारी के कारण निधन हो गया। परिवार और सगे संबंधियों ने साथ नहीं दिया तो राजकुमारी हर तरह से टूट गई। इसी दौरान शहर में ही राजकुमारी को सड़क पर भटकती छह माह की मासूम मिनाक्षी मिली। राजकुमारी ने उसे अपना लिया। मिनाक्षी जब बड़ी हुई तो उसने भी मां की सेवा में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। मंगलवार को लंबी बीमारी के चलते जब राजकुमारी का निधन हुआ तो पुत्र बनकर श्मशान घाट पर मां की चिता को आग भी लगाई। इस मौके पर प्रेमशंकर तिवारी, आकाश पांडेय, पूर्व प्रधान गुड्डू, बब्बन तिवारी आदि मौजूद रहे।

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