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खुली आंखों से देखिए नगर पालिका पीडीडीयू नगर का विकास, होंगे निराश

चंदौली। टूटी सड़कें, बजबजाती नालियां और बीच शहर कूड़े का ढेर। यह नजारा है आदर्श नगर पालिका बनने जा रहे पीडीडीयू नगर का। ऐसे में कहीं जिम्मेदारों से यह पूछने की हिमाकत कर बैठे की समस्या कब तक दूर होगी तो पूरा ठीकरा कोरोना पर फोड़ दिया जाएगा। अब तो बस इंतजार है कि सरकार से कुछ धन मिले और उसका उसी तरीके से इस्तेमाल किया जाए जैसा पिछले बजट का किया गया। सड़क एक तरफ से बनती गई और दूसरी तरफ से टूटती गई। ठेकेदार से लेकर चेयरमैन तक सत्ता की चादर ओढ़े बैठे हैं तो कार्रवाई की बात सोचिए भी मत।


चंदौली की एकमात्र नगर पालिका पीडीडीयू नगर इन दिनों बदहाल है। तकरीबन सभी आंतरित मार्ग क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कुछ सड़कों पर तो इतने गड्ढे हैं कि पैदल चलना भी जोखिम मोल लेने के बराबर हो गया है। पिछड़े वार्डों की दशा तो और भी खराब हो चुकी है। नालियां बजबजा रही हैं और जहां-जहां कूड़ा गिराया जा रहा है। नागरिकों की फजीहत हो रही है लेकिन उनकी सुने कौन। जो सुनने वाले हैं कान में रुई डाले बैठे हैं। शासन स्तर से जो विकास कार्य कराए जा रहे हैं उन्हीं का उद्घाटन कर खुद की पीठ थपथपाई जा रही है। लेकिन जिन कामों की सबसे अधिक दरकार है नहीं हो रहे। पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी बजट का रोना रो रहे हैं। यानी सबकुछ भगवान भरोसे ही है। ईओ कृष्णचंद्र का कहना है कि पालिका के पास बजट ही नहीं है कि विकास कार्य कराए जाएं। कर्मचारियों को वेतन तक समय से नहीं मिल पा रहा।

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