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Chandauli News : वरिष्ठ चिकित्सक डा. राजीव ने जीती दो दशक लंबी कानूनी लड़ाई, इलाज में लापरवाही मामले में न्यायालय ने माना निर्दोष

चंदौली। मरीज के इलाज में लापरवाही से जुड़े 23 साल पुराने मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता निवारण आयोग ने वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और अलीनगर स्थित जेजे नर्सिंग होम संचालक डा. राजीव को क्लीन चिट दे दी। अस्पताल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आयोग ने कहा कि अपीलार्थी चिकित्सक एक योग्य सलाहकार व कार्डियोलाजिस्ट हैं। कोई भी बुद्धिमान पेशेवर ऐसा काम नहीं करेगा, जिससे रोगी को हानि पहुंचे और उसके पेशे को खतरा पैदा हो। डा, राजीव ने पीडीडीयू नगर में पत्रकार वार्ता के दौरान यह जानकारी दी।

 

रिचा सिंह 2001 में राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दाखिल किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि बुखार के इलाज के दौरान उनके पैर में बैंडेज बांधा गया था। इसके चलते उनके पैर में गैंगरीन हो गया। उन्होंने इसका इलाज बीएचयू और फिर मुंबई में कराया। जहां इलाज के दौरान गैंगरीन का प्रसार रोकने के लिए उनका पैर काटना पड़ा। इसके बाद उन्हें कृतिम पैर लगाया गया। राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने शिकायत को आशंकि रूप से मंजूरी देते हुए चिकित्सा लापरवाही पर मरीज को 20 लाख रुपये 6 फीसद ब्याज के साथ अदा करने का आदेश दिया था। इस आदेश को चिकित्सा संस्थान ने राष्ट्रीय उपभोक्ता निवारण आयोग में चुनौती दी। आयोग ने अपने फैसले में कहा कि अपीलार्थी एक पात्र सलाहकार चिकित्सक व कार्डियोलाजिस्ट हैं। कोई भी बुद्धिमान पेशेवर ऐसी इच्छाशक्ति से काम नहीं करेगा, जिससे रोगी को हानि या चोट पहुंचे और उसके पेशे के नाम पर खतरा होता है। कहा कि अपीलकर्ता रिचा सिंह के पास उच्च गुणवत्ता वाले बुखार का इतिहास था। उसके इलाज में अन्य दवाइयों के साथ इंट्रावेनस जैसी दवाइयां शामिल थीं। मरीज के डिस्चार्ज पर्चा पर दवाइयां और सिरप लिखा गया, लेकिन कोई इंजेक्शन नहीं। बाएं पैर पर किसी बैंडेज का उल्लेख नहीं था। घटना होने के छह साल बाद शिकायत दाखिल की गई। आयोग ने माना कि चिकित्सक के चिकित्सा कौशल में कोई कमी नहीं है। पत्रकार वार्ता में उपस्थित इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्यों ने डॉ राजीव की जीत पर उन्हें बधाई दी। कहा कि न्यायालय का यह फैसला न सिर्फ डॉ राजीव बल्कि अन्य चिकित्सकों के लिए भी नजीर बनेगा। इस दौरान अध्यक्ष डा डीपी सिंह, सचिव डा राजेंद्र श्रीवास्तव, डा सी सोम, डा गौतम त्रिपाठी, डा रवि आदि रहे।

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