
संवाददाता- बाबू चौहान
चंदौली। गांवों को स्वच्छ रखने के लिए सरकार की ओर से तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन शहाबगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत इलिया में सफाई व्यवस्था बदहाल नजर आ रही है। यहां सफाई कर्मियों का इंतजार करते-करते ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया है। शनिवार को सफाई व्यवस्था की बदहाली का ऐसा ही नजारा सामने आया, जब अनुसूचित जाति बस्ती में नालियों की सफाई के लिए महिलाएं खुद फावड़ा लेकर उतर गईं। कस्बे में जगह-जगह कूड़े का ढेर और गंदगी से बजबजाती नालियां जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं।
इलिया कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। कहीं सड़क किनारे कूड़ा बिखरा पड़ा है तो कहीं नालियों में गंदगी जमा होने से पानी की निकासी बाधित है। कई स्थानों पर नालियों से निकाली गई गंदगी भी किनारे छोड़ दी गई है। इससे दुर्गंध फैलने के साथ ही रास्तों पर गंदा पानी जमा हो रहा है। लोगों को आवागमन में भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई कर्मी नियमित रूप से गांव में नहीं आते। कभी-कभार पहुंचते भी हैं तो चुनिंदा स्थानों पर सफाई कराकर फोटो खिंचवाने तक ही जिम्मेदारी निभाई जाती है। आरोप है कि सफाई कर्मियों की जगह दूसरे मजदूरों से काम कराया जाता है, लेकिन उनसे भी पूरे कस्बे की सफाई नहीं कराई जाती। नतीजा यह है कि कई बस्तियों में लंबे समय से गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
महिलाओं को खुद उठाना पड़ा सफाई का जिम्मा
अनुसूचित जाति बस्ती की स्थिति सबसे खराब बताई जा रही है। यहां नालियों की सफाई नहीं होने से परेशान महिलाओं को खुद फावड़ा उठाना पड़ा। शनिवार को एक महिला नाली से गंदगी निकालती नजर आई। ग्रामीणों का कहना है कि जमा गंदगी और जलभराव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ने तथा संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है।
एडीओ पंचायत ने प्रधान पर डाली जिम्मेदारी
मामले में एडीओ पंचायत अरविंद सिंह से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि इलिया कोई छोटा-मोटा गांव नहीं है और सफाई का कार्य उनके अंतर्गत नहीं आता, बल्कि ग्राम प्रधान के जिम्मे है। इतना कहने के बाद उन्होंने फोन काट दिया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सफाई कर्मियों की तैनाती, उपस्थिति और कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। ग्रामीणों ने नियमित सफाई कराने और लापरवाह कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

