
चंदौली। जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी, ओवररेटिंग और अनियमित बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों तथा जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के आदेश के अनुपालन में शुक्रवार को कृषि विभाग की संयुक्त टीमों ने जिले के विभिन्न तहसीलों में उर्वरक बिक्री केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। अभियान के दौरान कई दुकानों पर अनियमितताएं मिलने पर पांच उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जबकि कुल 10 उर्वरक नमूने जांच के लिए संग्रहित किए गए।
निरीक्षण का नेतृत्व जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने किया। जांच के दौरान कंदवा स्थित मेसर्स गुप्ता खाद भंडार में वितरण रजिस्टर अधूरा पाया गया तथा दुकान पर निर्धारित रेट बोर्ड भी प्रदर्शित नहीं था। इस पर संबंधित विक्रेता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। वहीं तलाशपुर स्थित मेसर्स प्रकाश खाद भंडार, कंदवा के मेसर्स श्रीराम फर्टिलाइजर और मेसर्स आलोक उर्वरक केंद्र निरीक्षण के समय बंद मिले, जिसके चलते इन प्रतिष्ठानों से भी स्पष्टीकरण मांगा गया।

इसी क्रम में वरिष्ठ प्राविधिक सहायक (ग्रुप-ए) डॉ. पूजा त्रिपाठी ने चकिया और नौगढ़ तहसील क्षेत्र में निरीक्षण किया। यहां मेसर्स रिशु कृषि केंद्र पर रेट बोर्ड प्रदर्शित नहीं मिला और स्टॉक एवं वितरण रजिस्टर भी अद्यतन नहीं पाए गए। विभाग ने इस प्रतिष्ठान को भी कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने किसानों को भरोसा दिलाया कि जिले में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है और किसी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले में 19,545 मीट्रिक टन यूरिया, 5,088 मीट्रिक टन डीएपी, 372 मीट्रिक टन एमओपी, 3,992 मीट्रिक टन एनपीके तथा 13,507 मीट्रिक टन एसएसपी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि खाद खरीदते समय अपने साथ फार्मर आईडी अवश्य लेकर जाएं। जिन किसानों के पास फार्मर आईडी उपलब्ध नहीं है, वे प्रमाणित खतौनी के आधार पर उर्वरक प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही जिन किसानों की फार्मर आईडी अभी तक नहीं बनी है, वे इसे शीघ्र बनवा लें।

कृषि विभाग ने सभी उर्वरक विक्रेताओं को निर्देशित किया है कि वे अपने प्रतिष्ठानों पर लाइसेंस, रेट बोर्ड, स्टॉक एवं वितरण रजिस्टर अद्यतन रखें और निर्धारित सरकारी दरों पर ही उर्वरकों की बिक्री करें। जिला कृषि अधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि किसी विक्रेता द्वारा ओवररेटिंग, कालाबाजारी अथवा अन्य अनियमितता की शिकायत प्रमाण सहित प्राप्त होती है तो उसके विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

