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मणिकर्णिका घाट पुनर्निर्माण पर भ्रम फैलाने वालों को मंत्री ए.के. शर्मा का जवाब, कहा— विरासत के साथ विकास सरकार की प्राथमिकता

वाराणसी। काशी के विश्वप्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट के पुनर्निर्माण को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री श्री ए.के. शर्मा ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि मणिकर्णिका घाट काशी की पौराणिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण धरोहर है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में दाह-संस्कार होते हैं, लेकिन दशकों से यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव रहा है।

मंत्री ने कहा कि बैठने, ठहरने, लकड़ी भंडारण, पूजा सामग्री, मुंडन स्थल और साफ-सफाई जैसी आवश्यक सुविधाओं की कमी से लोगों को भारी परेशानी होती थी, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने इस दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, नमो घाट, अस्सी घाट जैसे विकास कार्यों से काशी को नई पहचान मिली है और उसी क्रम में मणिकर्णिका घाट का सुव्यवस्थित पुनर्निर्माण शुरू किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना के तहत पौराणिक मंदिरों, चिन्हों और धरोहरों का पूरा संरक्षण किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में दिखाई दे रही कलाकृतियां सुरक्षित रूप से संस्कृति विभाग के पास रखी गई हैं, जिन्हें कार्य पूर्ण होने के बाद यथास्थान पुनः स्थापित किया जाएगा। किसी भी मंदिर या धरोहर को क्षति नहीं पहुंची है।

मंत्री ने विपक्ष पर राजनीतिक स्वार्थ के चलते जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार “विरासत के साथ विकास” की भावना के अनुरूप काशी की भव्यता और मानवीय सुविधाओं को बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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