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Chandauli news: पहले जालसाजों ने उड़ा दी लाखों की चेन, अब एसपी चंदौली के नाम पर ठगी की कोशिश, हैरान कर देगा मामला

शुक्रवार को साइबर ठग ने हरिशंकर तिवारी के पुत्र योगेश को फोन किया। खुद को एसपी कार्यालय का कर्मचारी बताते हुए कहा कि उनकी चेन बरामद हो गई है और ठगों को भी पकड़ लिया गया है।
  • साइबर ठगी का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है
  • साइबर ठग ने एसपी कार्यालय का कर्मचारी बनकर पीड़ित परिवार को फोन किया

चंदौली। साइबर ठगी का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। कुछ दिन पूर्व जालसाजों ने मुग़लसराय कोतवाली क्षेत्र के रौना गांव में गहना साफ करने के नाम पर महिलाओं के लाखों रुपये के आभूषण उड़ा दिए। वहीं शुक्रवार को साइबर ठग ने एसपी कार्यालय का कर्मचारी बनकर पीड़ित परिवार को फोन किया और चोरी गए गहने बरामद होने की बात कह कर फोन पे के जरिए पांच हजार रुपये भेजने की बात कही। ठग ने कहा कि पूरा मामला एसपी के संज्ञान में है और उन्होंने ही फोन कर सूचना देने की बात कही है। बहरहाल दूध का जला छांछ भी फूंक कर पीता है लिहाजा परिवार ने ठग की मंशा भांप ली और पैसे देने के इंकार कर दिया।

ये है पूरा मामला
कुछ दिनों पूर्व रौना गांव निवासी रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर हरिशंकर तिवारी के घर बाइक सवार दो युवक पहुंचे। जहां बीम बार कंपनी का कर्मचारी बताकर घर में महिलाओं को प्रलोभन देकर आभूषण साफ करने की बात बताई। इसके बाद महिलाओं ने पहले पायल निकाल कर साफ करने के लिए उन्हें दे दिया। इस दौरान पायल साफ करते वक्त ठग ने गले का सोने का चेन भी मांगा और एक टिफिन बॉक्स निकाल कर उसमें पानी डालकर कहा कि इसको गैस पर गर्म कर दीजिए। इसमें सारे गहने हैं। आधे घंटे बाद जब ठंडा हो जाए तो सारे गहने निकाल लीजिएगा। जब महिलाओं ने टिफिन बाक्स गर्म करने के घर में गई तब तक ठग दोनों ठग बाइक लेकर पड़ाव की तरफ भाग निकले। महिलाएं बाहर आईं तो उनके होश उड़ गए और रोने चिल्लाने लगीं।

 

साइबर ठग ने एसपी के नाम पर किया फोन
शुक्रवार को साइबर ठग ने हरिशंकर तिवारी के पुत्र योगेश को फोन किया। खुद को एसपी कार्यालय का कर्मचारी बताते हुए कहा कि उनकी चेन बरामद हो गई है और ठगों को भी पकड़ लिया गया है। उसने कहा कि खुद एसपी ने फोन कर उन्हें सूचना देने को कहा है। यह भी कि बरामद माल छुड़ाने में पांच हजार का खर्च आएगा जो तत्काल फोन पे से देना होगा। योगेश ने कहा कि मेरे पास कैश है मैं चंदौली आकर दे देता हूं। लेकिन जालसाज आनलाइन पेमेंट कराने की बात पर अड़ा रहा। अंत में योगेश जालसाज के इरादे भांग गए और पैसा नहीं भेजा। लेकिन सवाल यह कि साइबर ठगों को योगेश का नंबर कैसे मिला और उन्हें यह कैसे पता चला कि परिवार के साथ इस तरह की ठगी हुई है।

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