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चंदौलीचुनाव 2024

Chandauli News : बड़े नेताओं का कार्यक्रम लगने से भाजपाइयों का जोश हाई, अखिलेश की सभा में कायदे की भीड़ नहीं जुटा पाए सपाई

चंदौली। जिले में अंतिम चरण में एक जून को मतदान होगा। ऐसे में राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रचार के मामले में भाजपा सबसे आगे है। मुख्यमंत्री चंदौलीवासियों के बीच पहुंचकर डा. महेंद्रनाथ पांडेय के लिए वोट मांग चुके हैं। वहीं पार्टी के अन्य दिग्गज नेताओं का जमावड़ा अगले दो दिनों तक चंदौली में होने वाला है। इसकी तुलना में प्रमुख प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी काफी पीछे है। यहां तक कि पार्टी के शीर्ष नेता अखिलेश यादव की जनसभा में भी कायदे की भीड़ नहीं जुटा पाए।

 

बीजेपी ने लगातार तीसरी बार डा. महेंद्रनाथ पांडेय को भरोसा जताते हुए उन पर अपना दांव लगाया है। सपा ने पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह को टिकट दिया है। कांग्रेस व इंडिया गठबंधन के घटक दलों ने वीरेंद्र सिंह को अपना समर्थन दिया है। चुनाव की तिथि नजदीक आने के साथ ही जिले में राजनीतिक दलों के दिग्गज नेताओं की आमदरफ्त बढ़ गई है। प्रचार-प्रसार के मामले अब तक बीजेपी सबसे आगे चल रही है। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ चंदौली में जनसभा कर डा. पांडेय के समर्थन में वोट मांग चुके हैं। वहीं केंद्रीय गृहमंत्री ने चंदौली लोकसभा प्रत्याशी के पक्ष में वाराणसी में जनसभा को संबोधित किया। इसके अलावा पार्टी के तमाम दिग्गज नेताओं के कार्यक्रम जिले में लगे हैं। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह चुनाव प्रचार के आखिरी दिन 30 मई को चंदौली में जनसभा करने वाले हैं। वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या भी कुशवाहा बिरादरी को साधने के लिए चंदौली आएंगे। इस लिहाज से देखा जाए तो सपा काफी पीछे है। अखिलेश तो चंदौली आए, लेकिन इंडिया गठबंधन की प्रमुख घटक दल मानी जाने वाली कांग्रेस का कोई स्टार प्रचारक चंदौली में सपा उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करने नहीं पहुंचा। राजनीतिक पंडितों की मानें तो चुनाव पर इसका असर पड़ सकता है। बीएसपी की बात करें तो मायावती एकमात्र चेहरा हैं, जिनके पास वोट को कन्वर्ट करने का हुनर है। इस बार चंदौली में बसपा प्रमुख का कार्यक्रम भी नहीं लगा।

 

पूर्व सीएम के मंच पर नहीं नजर आए पूर्व सांसद

जिले के सपा के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने इस बार चुनाव प्रचार में शुरू से ही दूरी बनाए रखी। यहां तक कि अखिलेश यादव के मंच पर भी रामकिशुन नजर नहीं आए। दरअसल, समर्थक चाहते थे कि इस बार रामकिशुन को टिकट मिले, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने वीरेंद्र सिंह पर भरोसा जताया। इसको लेकर विरोध भी हुआ था। शायद इसलिए ही रामकिशुन इस बार के लोकसभा चुनाव में वे जनता के बीच नजर नहीं आ रहे।

 

 

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