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चंदौलीप्रशासन एवं पुलिसराज्य/जिला

युवाओं की जिंदगी से करते थे खिलवाड़, सेना भर्ती के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाला गिरोह चढ़ा पुलिस के हत्थे, कहानी चौंकाने वाली

चंदौली। सेना भर्ती के नाम पर फर्जीवाड़ा कर युवाओं की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले जालसाजों का गिरोह चंदौली पुलिस के हत्थे चढ़ गया। कूटरचित दस्तावेजों के जरिए फर्जी नियुक्ति पत्र देकर बेरोजगारों से पांच लाख रुपये की वसूली करते थे। धानापुर पुलिस और स्वाट टीम ने मंगलवार की शाम गिरोह के सरगना सहित छह सदस्यों को धर दबोचा। आरोपित सेना की वर्दी में थे और पकड़ में आने के बाद पुलिस टीम को अरदब में लेने की कोशिश की। लेकिन सख्ती के बाद सभी टूट गए और अपना जुर्म कबूल कर दिया। जिस अर्टिगा कार से आरोपितों को पकड़ा गया उसमें सेना की वर्दी, सेना की फर्जी मोहर, आर्मी कैंटीन कार्ड, दो पिस्टल सहित भारी मात्रा में जाली दस्तावेज बरामद हुए।

जालसाज युवाओं को ऐसे बनाते थे शिकार
चहनियां-धानापुर मार्ग पर पुलिस ने अर्टिगा सवार युवकों को पकड़ा तो तीन आरोपितों रविकांत, विकास और रोहित ने पुलिस को अरदब में लेने की कोशिश की। कहा कि तीनों सेना में हैं और छुट्टी पर घर जा रहे हैं। धमकी दी कि यदि उन्हें परेशान किया गया तो अपने अधिकारियों से इसकी शिकायत कर देंगे। लेकिन पुलिस ने उनके बटालियन का पता और अधिकारियों का नाम पूछा तो सकपका गए और भागने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने तीनों को दौड़ाकर पकड़ लिया। पूछताछ में अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि वे सेना में नहीं हैं। ठगी के लिए सेना की वर्दी पहनते हैं। धानापुर क्षेत्र के रायपुर निवासी रविकांत यादव ने बताया कि गांव के लोग संदीप के नाम से जानते हैं। सबको लगता है कि मैं सेना में भर्ती हूं। 2008 में सेना की भर्ती निकली थी, जिसममें मैंने भाग लिया। फिजिकल और मेडिकल पास करने के बाद 39 जीटीजी वाराणसी में लिखित परीक्षा दी। जॉइनिंग लेटर मिलने के बाद एएडी रेजिमेंट गोपालपुर उड़ीसा ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। इस बीच एआरओ वाराणसी से जो चयनित अभ्यर्थियों की सूची दी गई उसमें मेरा नाम नहीं था। मुझे एआरओ आफिस वाराणसी बुलाया गया और बताया गया कि मेरे अनुक्रमांक पर जिसने परीक्षा दी थी वह जेल चला गया। बाद में सत्यापन के बाद दोबारा मेरा चयन कर ट्रेनिंग के लिए बांबे इंजीनियरिंग ग्रुप पुणे भेजा गया, जहां मैंने 19 सप्ताह की आर्मी ट्रेनिंग ली। 11 हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान भी किया गया। 28 दिन की छुट्टी पर घर आने के बाद मुझे दोबारा एआरओ आफिस वाराणसी बुलाया गया और पूछताछ की गई। बताया गया कि मैंने गलत तरीके से परीक्षा पास की है। मैंने बताया कि सेना से रिटायर्ड मेरे मामा ताजपुर गाजीपुर निवासी जनार्दन यादव और उन्हीं के गांव के लोरिक यादव ने पैसा लेकर मेरी लिखित परीक्षा पास करवाई। इसके बाद मुझे ट्रेनिंग से निकाल दिया गया। इस दौरान मैं सेना भर्ती के बारे में काफी कुछ जान गया था। इसके बाद जब भी आर्मी की भर्ती होती मैं सेंटर पर पहुंच जाता था। सकलडीहा के जगदीश यादव और हरपुर के जमानिया के अखिलेश यादव जो सेना में हैं उनसे मेरा परिचय हो गया। गांव के आस-पास के लड़कों से आर्मी की लिखित परीक्षा और मेडिकल पास कराने के नाम पर पांच-पांच लाख रुपये लेने लगा। जगदीश और अखिलेश के सहयोग से कई युवाओं को सेना में भर्ती करवाया, जिससे क्षेत्र में काफी नाम हो गया। 2019 में वाराणसी में आर्मी की भर्ती निकली तो तकरीबन 25 लोगों ने भर्ती कराने के लिए मुझसे संपर्क किया। सबसे चार-चार लाख रुपये लेकर मैंने एचडीएफसी एकाउंट में जमा करवा दिए। बाद में रिजल्ट आया तो सभी लड़के फेल हो गया। मैंने सबको बताया कि दोबारा लिखित परीक्षा होगी जिसमें सबको पास करवा दिया जाएगा। इसी बीच लाकडाउन लग गया। सभी अभ्यर्थी मुझसे पैसे मांगने लगे। इसके बाद मैंने अपने मामा के लड़के विकास और अपने छोटे भाई रोहित को फर्जी नियुक्ति पत्र बनाकर ट्रेनिंग के नाम पर भोपाल भेज दिया और आर्मी की वर्दी पहनाकर गांव और आस-पास प्रचार करवाया कि मैंने अपने भाईयों को भर्ती करवा दिया। इसके बाद और भी लोग भर्ती के लिए पैसे देने लगे। 2019 में भर्ती हुए रंगरूटों को ट्रेनिंग में जाने का आदेश हुआ तो मुझे लगने लगा कि अब मामला फंस जाएगा। मैंने जितने लोगों से पैसे लिए थे सभी को मेजर फार कमांडेंट के नाम का फर्जी नियुक्ति पत्र पकड़ा दिया जिसे मालती डिजिटल स्टूडियो एवं साइबर कैफे अलीनगर में बनवाया था। ट्रेनिंग के लिए जबलपुर और लखनऊ गए मेरे 12 लड़के सत्यापन में पकड़े गए। सभी को जेल भेज दिया गया। इसह के बाद से मैं छिप-छिपाकर रह रहा था। जो 50-60 लाख रुपये जालसाजी के जरिए कमाए थे उनसे घर बनवाया और एक बुलेट खरीदी। शेष पैसे उड़ा दिए। आरोपितों की निशानदेही पर पुलिस ने तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया।

ये जालसाज पकड़े गए
पुलिस के हत्थे चढ़े जालसाजों में गिरोह का सरगना रविकांत उर्फ मुक्कू पुत्र चंद्रसेन यादव निवासी रायपुर थाना धानापुर, रिंकू यादव निवासी संघती थाना अलीनगर, विकास सिंह निवासी नई बस्ती हरपुर थाना जमानिया, गाजीपुर, रोहित यादव निवासी रायपुर, दीपक यादव निवासी कम्हरिया आजमगढ़ और देवेंद्र श्रीवास्तव निवासी मवई खुर्द अलीनगर शामिल हैं।

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