
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था को पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में फर्जी रजिस्ट्रियों और छद्म व्यक्तियों के माध्यम से होने वाले भूमि घोटालों पर रोक लगाने के उद्देश्य से आधार आधारित प्रमाणीकरण व्यवस्था लागू की जा रही है।
प्रदेश के स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2024 को प्रभावी कर दिया गया है। इसके तहत संपत्ति पंजीकरण के दौरान पक्षकारों, निष्पादकों एवं गवाहों की पहचान ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और ई-हस्ताक्षर के माध्यम से की जाएगी।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 28 अगस्त 2025 को हुई स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की समीक्षा बैठक में फर्जी रजिस्ट्रियों पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। इन्हीं निर्देशों के क्रम में आवश्यक अधिसूचनाएं जारी की गई हैं।
अधिसूचना 02 अगस्त 2024 के माध्यम से रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा-69 के अंतर्गत शक्तियों का प्रयोग करते हुए नई नियमावली लागू की गई है। इसके तहत आगामी एक फरवरी से प्रदेश के सभी उप निबंधक कार्यालयों में आधार आधारित पहचान सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में सभी उप निबंधक कार्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही भूमि एवं अचल संपत्ति से जुड़े फर्जीवाड़े, कूटरचित दस्तावेजों और विवादों में कमी आएगी।

