
चंदौली। एक फ़रवरी को पेश होने वाला केंद्रीय बजट इस बार केवल आंकड़ों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक दबावों, घरेलू बैंकिंग चुनौतियों और चुनावी समीकरणों के बीच संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्थिरता, सोने-चांदी की रिकॉर्ड कीमतें, बैंकों में घटती डिपॉज़िट ग्रोथ और चुनावी राज्यों की राजनीति—इन सभी का असर बजटीय नीतियों में दिख सकता है।
एक्साइज ड्यूटी में कटौती की संभावना
सरकार पर बढ़ते कर्ज़ दबाव और महँगे आयात के बीच सोना-चांदी व्यापार संतुलन पर असर डाल रहे हैं। ऐसे में सोने पर एक्साइज या संबंधित करों में कटौती कर बाजार को स्थिर करने का कदम उठाया जा सकता है। इससे ज्वेलरी सेक्टर को राहत मिलने के साथ तस्करी पर भी अंकुश लग सकता है।
सेविंग अकाउंट और FD पर बेहतर ब्याज दरें
बैंकों की डिपॉज़िट ग्रोथ धीमी जबकि लोन डिमांड तेज़ बनी हुई है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए सरकार या नियामक संस्थाएं बैंकों को सेविंग अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉज़िट पर आकर्षक ब्याज दरें देने के लिए प्रेरित कर सकती हैं, ताकि बाजार का पैसा फिर से बैंकिंग सिस्टम में लौटे।
LTCG टैक्स बढ़ने की आशंका
शेयर बाजार में निवेश का स्तर ऊँचा है। सरकार यदि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में वृद्धि करती है तो इससे न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि निवेशकों को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर मोड़ने में भी मदद मिलेगी।
चुनावी राज्यों के लिए विशेष पैकेज
West Bengal, Kerala और Tamil Nadu जैसे राज्यों में आगामी चुनावों को देखते हुए केंद्र सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं के लिए विशेष पैकेज की घोषणा कर सकती है।
किसान सम्मान निधि में बढ़ोतरी संभव
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाने या अतिरिक्त किस्त देने की घोषणा की संभावना जताई जा रही है। इससे ग्रामीण मांग बढ़ेगी और FMCG व उपभोग क्षेत्रों को बल मिलेगा।
बैंक डिपॉज़िट सुरक्षा सीमा बढ़ाने पर विचार
वर्तमान में बैंक डूबने की स्थिति में जमाकर्ताओं को अधिकतम ₹5 लाख तक की सुरक्षा मिलती है। महँगाई और बड़े खातों को देखते हुए इसे ₹10 लाख तक बढ़ाने की मांग तेज़ है, जिस पर सरकार विचार कर सकती है।
टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव की उम्मीद कम
संकेत मिल रहे हैं कि आयकर स्लैब में इस बार बड़े बदलाव नहीं होंगे, क्योंकि सरकार राजस्व स्थिरता बनाए रखना चाहती है और पहले ही कई कर राहतें दी जा चुकी हैं।
सोने पर टैक्स में राहत की चर्चा
सोने की ऊँची कीमतों के बीच यदि सरकार करों में राहत देती है तो मांग बढ़ सकती है। हालांकि आयात दबाव संतुलित करने के लिए इसके साथ अन्य उपाय भी अपनाए जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह बजट आर्थिक संतुलन, बैंकिंग सिस्टम की मजबूती और चुनावी रणनीति का मिश्रण हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों और आम जनता को जल्दबाज़ी के बजाय बजटीय घोषणाओं का धैर्यपूर्वक इंतज़ार करना चाहिए।
लेखक — डॉ. विनय प्रकाश तिवारी
संस्थापक, Daddy’s International School
बिशुनपुरा कांटा, चंदौली (उत्तर प्रदेश)

