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Mukhtar death : अपराधों का मुख्तार, तख्त से ताबूत तक, 40 साल तक चली अदावत में खून से रंगा रहा पूर्वांचल

मुख्तार अंसारी
  • मुख्तार अंसारी की मौत, आपराधिक इतिहास, पूर्वांचल में गैंगवार

जय तिवारी की रिपोर्ट 

चंदौली। मुख्तार अंसारी को शनिवार को उसके पुश्तैनी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। इसके साथ ही 40 साल तक के अपराधों के इतिहास का चैप्टर भी बंद हो गया। 1984 से गाजीपुर के मुडियार गांव से शुरू अदावत में चार दशक तक पूर्वांचल खून से रंगा रहा। हत्या, अपहरण, रंगदारी समेत न जाने कितने आपराधिक किस्से मुख्तार के जिम्मे दर्ज हैं, जिनकी चर्चाएं उसकी मौत के बाद भी होती रहेंगी।

मुख्तार ने अपराध की बदौलत पैसा और रुतबा दोनों कमाया। भ्रष्ट राजनीति का सहारा लेकर तख्त तक पहुंच गया और इसका जमकर दुरुपयोग भी किया। मुख्तार पर अकेले 60 से अधिक मामले दर्ज रहे। वहीं परिवार को मिलाकर देखा जाएगा 90 से अधिक आपराधिक मामले हैं। मुख्तार ने जेल में डेढ़ दशक से अधिक समय काट दिए। 18 साल बाद शुक्रवार की रात ताबूत में घर लौटा। जेल में रहते हुए भी मुख्तार की बसपा और सपा की सरकारों में हनक कम नहीं हुई। ऐसी पहुंच थी कि प्रशासन हमेशा उसके सामने नतमस्तक ही रहा। योगी सरकार में मुख्तार पर शिकंजा कसना शुरू हुआ। वहीं उसके सबसे करीबी मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद वह कमजोर पड़ने लगा। इसके बाद भी राजनीतिक दबदबा कम नहीं हुआ। भाई अफजाल गाजीपुर से सांसदी जीते और बेटा मऊ से विधायक बन गया।

जानिये कहां से शुरू हुई अदावत

अंतरराज्यीय गिरोह (आईएस 191) के सरगना रहे माफिया मुख्तार अंसारी का आपराधिक इतिहास लंबा है। गाजीपुर के मुड़ियार गांव में डेढ़ बिस्वा जमीन के विवाद ने पूर्वाचल में गैंगवार का रूप ले लिया। मुड़ियार गांव निवासी रमापति सिंह की भतीजे साधु सिंह और मकनू सिंह से डेढ़ बिस्वा जमीन को लेकर विवाद था। 24 जून 1984 को रमापति सिंह की साधु सिंह ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। यहीं से पूर्वांचल में गैंगवार को शुरुआत हुई और एक के एक बाद कुल नौ हत्याएं हुई। रमापति सिंह की हत्या के बदले में 10 अक्तूबर 1985 को उनके बेटों ने मकनू सिंह की हत्या कर दी। इसके बाद साधु सिंह ने 2 जनवरी 1986 को रमापति सिंह के दो बेटों की हत्या की। यह ऐसा पहला मर्डर था, जिसमें मुख्तार अंसारी भी शामिल था, लेकिन उसका नाम कहीं नहीं आया।

 

ठेकेदार सच्चिदानंद राय की हत्या के बाद सुर्खियों में आया मुख्तार
मुख्तार अंसारी पहले छोटे-मोटे काम करता था। उसके इलाके में तेजी से उभरता हुआ एक नाम सच्चिदानंद राय का था। मुख्तार के पिता से सच्चिदानंद की कुछ कहासुनी हुई तो मुख्तार ने उसे प्रतिष्ठा का विषय बना लिया। उसने साधु सिंह की मदद ली। 17 जुलाई 1986 को सच्चिदानंद राय की हत्या कर दी गई और यहीं से मुख्तार का नाम जरायम जगत में सुर्खियों में आया। साधु सिंह की हत्या के बाद 20 नवंबर 1989 को मुख्तार ने उसके गैंग की कमान संभाली। मई 1990 में बनारस कचहरी में रमापति सिंह के छोटे बेटे त्रिभुवन सिंह के सिर पर हाथ रखने वाले चंदौली के धानापुर के सकरारी निवासी साहिब सिंह की हत्या में मुख्तार का नाम आया। इसके बाद गाजीपुर में हुईं कई हत्याओं में मुख्तार की संलिप्तता सामने आई।

कृष्णानंद राय की हत्या से दहल उठा पूर्वांचल
मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी को हराकर गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से विधायक बने गोड़उर निवासी कृष्णानंद राय की 29 नवंबर 2005 को नृशंस हत्या की गई। कृष्णानंद समीप के गांव से क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन कर लौट रहे थे। उसी दौरान रास्ते में गोलियां बरसाकर उनकी और उनके साथ गाड़ी में मौजूद 6 अन्य लोगों की हत्या कर दी गई। विधायक की हत्या के बाद पूर्वांचल दहल उठा। इस हत्याकांड में मुख्तार का नाम आया था। मामला सीबीआई कोर्ट तक पहुंचा। सीबीआई अदालत से मुख्तार को क्लीनचिट मिल गई।

अवधेश राय को घर के पास मौत के घाट उतारा
व्यापारियों से रंगदारी वसूलने में आड़े आ रहे अवधेश राय की उनके घर के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मुख्तार पर आरोप लगे। दरअसल, मुख्तार व्यापारियों से रंगदारी वसूलता था। अवधेश राय का भी अपने इलाके में अच्छा-खासा दबदबा था। अवधेश राय बीच में आ गए। उनकी भी हत्या कर उन्हें रास्ते से हटा दिया।

बसपा ने बनाया विधायक
बसपा ने 1996 में मुख्तार को टिकट देकर मऊ सदर विधानसभा से विधायक बनवाया। इसके बाद मुख्तार पांच बार मऊ से विधायक रहा। उसके चुनाव लड़ने पर रोक लगी तो बेटे को चुनाव लड़ाकर जीता दिया।

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