
चंदौली। चहनियां ब्लॉक के टांडाकला गांव में एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया है। नवरात्रि के दौरान मंदिर में पूजा के समय आग से झुलसी पत्नी की गंभीर हालत देख पति यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर सके और अस्पताल परिसर में ही उन्हें दिल का दौरा पड़ गया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया।
टांडाकला निवासी 51 वर्षीय वीरेंद्र पांडेय की पत्नी किरन पांडेय नवरात्रि में काली मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए गई थीं। बरहम बाबा के स्थान पर दीप जलाते समय अचानक उनकी साड़ी में आग लग गई। आग तेजी से फैल गई और वह गंभीर रूप से झुलस गईं। मौके पर मौजूद लोगों और परिजनों ने तत्काल उन्हें वाराणसी के दीनदयाल अस्पताल में भर्ती कराया। हालत नाजुक होने पर उन्हें कबीरचौरा अस्पताल और बाद में बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया।
इलाज के दौरान किरन पांडेय की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। संक्रमण बढ़ने पर डॉक्टरों ने उनके दोनों पैर काटने तक की आशंका जताई थी। इधर, वीरेंद्र पांडेय खुद भी कुछ समय पहले पैर टूटने के कारण बैसाखी के सहारे चल रहे थे, लेकिन पत्नी की हालत जानने के लिए मंगलवार सुबह अस्पताल पहुंचे।
बताया जाता है कि जब उन्होंने पत्नी को बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच जूझते देखा, तो वह गहरे सदमे में आ गए। इसी दौरान अस्पताल परिसर में उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें दिल का दौरा पड़ा। डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
वीरेंद्र पांडेय कोलकाता में निजी नौकरी करते थे। उनके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा कोलकाता में रहकर मां की सेवा कर रहा था, जबकि छोटा बेटा चेन्नई में मर्चेंट नेवी में कार्यरत है। पिता की अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें अभी तक पति की मौत की जानकारी नहीं दी गई है।
गांव में इस घटना से शोक की लहर दौड़ गई है। वीरेंद्र पांडेय अपने मिलनसार स्वभाव और धार्मिक प्रवृत्ति के लिए जाने जाते थे। टांडाकला रामलीला समिति में वह वर्षों तक ‘परशुराम’ की भूमिका निभाते रहे। मंगलवार शाम गंगा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़े भाई किशोरी पांडेय ने मुखाग्नि दी। इस घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है।

