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Chandauli news: विचार गोष्ठी में जगतगुरु शंकराचार्य के व्यक्तित्व पर डाला प्रकाश, वक्ता बोले चमकदार आध्यात्मिक प्रकाश के अद्वितीय स्रोत थे शंकराचार्य

चंदौली। लाल बहादुर शास्त्री स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पंडित पारसनाथ तिवारी नवीन परिसर में गुरुवार को भारतीय भाषा समिति विद्याश्री न्यास और लाल बहादुर शास्त्री स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में जगतगुरु शंकराचार्य विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश के सदस्य प्रोफेसर हरेश प्रताप सिंह, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्रबंधक राजेश कुमार तिवारी, विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर प्रदीप कुमार, प्रोफेसर सुधाकर, प्रो हरी प्रसाद अधिकारी, प्राचार्य उदयन मिश्र ने मां सरस्वती व पंडित पारसनाथ तिवारी के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए दीप प्रज्ज्वलन किया।

 

प्रोफेसर हरेश प्रताप सिंह ने कहा कि आदि शंकराचार्य चमकदार आध्यात्मिक प्रकाश के अद्वितीय स्रोत थे उन्होंने संपूर्ण भारत भूमि को अपने ज्ञान से आलोकित किया, उनके उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक है। उनका व्यक्तित्व ऊर्जा व उत्साह से भरा हुआ था ,अपनी ऊर्जा से उन्होंने अध्यात्म की प्रवृत्ति को विकसित किया। उनका मानना था कि आत्मज्ञान के बिना समाज के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य की प्रणाली को जानने से हम सारे ब्रह्मांड के विषय में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आधुनिक भौतिक शास्त्र यह कहता है कि सारा ब्रह्मांड मूल रूप से एक ऊर्जा है ,यही बात आज से सैकड़ो वर्ष पहले शंकराचार्य ने कही थी की सृष्टि और सृष्टि कर्ता एक ही हैं। अब यह बात वैज्ञानिक काफी शोध के पश्चात स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया अवसाद में जी रही है और हम लोगों को उन्हें उसे बाहर लाना है यह तभी संभव हो पाएगा जबकि हम शंकराचार्य के विचारों को समाज के साथ जोड़ें। विषय प्रवर्तन करते हुए प्रोफेसर सुधाकर ने कहा कि आचार्य अर्थात गुरु कहता है हमारी अच्छी बात को ग्रहण करना और बुरी बात को छोड़ देना ,आज यह बात आवश्यक है कि शिक्षा सहज भाषा में दी जाए, सहज भाषा में दी गई शिक्षा समझ में आती है और ज्ञान का विस्तार होता है। प्रोफेसर हरि प्रसाद अधिकारी ने कहा कि शोध में फुटनोट देने की शुरुआत आदि शंकराचार्य ने की थी। प्रोफेसर अधिकारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में एकात्मबोध की भावना का प्रसार करने वाले आदि गुरु शंकराचार्य ही थे। शंकराचार्य को उन्होंने सर्व भेदभाव निवारक के रूप में प्रस्तुत किया। प्रोफेसर उपेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि आदि शंकराचार्य को अभिनव शंकर की उपाधि दी गई थी। उन्होंने अपने गुरु से चार वाक्य पूछे थे यह चारों वाक्य चारों वेदों से संबंधित थे इसी के आधार पर उन्होंने चार पीठों की स्थापना की थी। सकलडीहा पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर प्रदीप कुमार पांडे ने शंकराचार्य के संपूर्ण जीवन को संक्षिप्त रूप से रेखांकित किया, उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद शंकराचार्य जी के अहम् ब्रह्मास्मि से प्रभावित थे। अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय के प्राचार्य उदयन मिश्रा द्वारा किया गया धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर योगेंद्र ओझा ने किया। कार्यक्रम का संचालन इस परिसंवाद के संयोजक प्रोफेसर अरुण पांडे ने किया। इस अवसर पर प्रो संजय पाण्डेय, डा वंदना ओझा प्रोफेसर राजीव, प्रोफेसर इशरत, प्रो अजीत त्रिपाठी, प्रो धनंजय राय, डा भावना, डा कामेश, डा हेमंत, डा गुलजबी आदि रहे।

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