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Chandauli News : पूर्व विधायक का इंडो-इजराइल सब्जी अनुसंधान केंद्र पर धावा, बोले, ऊसर जमीन पर बन रहा सेंटर मात्र छलावा है

चंदौली। पूर्व विधायक व सपा नेता मनोज सिंह डब्लू केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ लगातार हमलावर हैं। सोमवार को माधोपुर में इंडो-इजराइल पद्धति पर तैयार किए जा रहे सब्जी अनुसंधान केंद्र पहुंचे। इस दौरान वहां का जायजा लिया। सेंटर को महज छलावा बताया। वहीं कृषि प्रधान जनपद में कृषि की पढ़ाई न होने पर सरकार व जनप्रतिनिधियों को आड़े हाथों लिया।

 

 

उन्होंने कहा कि इंडो-इजराइल सब्जी अनुसंधान केंद्र की स्थापना मात्र छलावा है। भाजपा यहां से मेडिकल कालेज को नौबतपुर ले गई। ऐसे में जनता को भ्रमित करने के लिए यहां इंडो-इजराइल सब्जी अनुसंधान केंद्र बनाने का छलावा किया। स्थिति यह है कि इस अनुसंधान केंद्र के लाभ से जनपद व यहां के किसान वंचित है। 6.66 करोड़ की लागत से अनुसंधान को स्थापित किया गया। यह जानकर आश्चर्य होगा कि जिस भूमि पर इंडो-इजराइज सब्जी अनुसंधान केंद्र को स्थापित किया है वह उसर की जमीन है और इसके बेकार होने की रिपोर्ट भी आ गयी है। सपा नेता ने जिम्मेदार नेताओं से सवाल किया कि जब इसकी स्थापना की जा रही थी तो जमीन की जांच क्यों नहीं की गई। यदि जांच हुई तो जांचकर्ता अधिकारी के खिलाफ अब तक कार्यवाही क्यों नहीं हुई। आरोप लगाया कि अपने राजनीति स्वार्थ को साधने के लिए जनता के 6.66 करोड़ रुपये भाजपा के नेताओं ने बर्बाद कर दिया। कहा कि इसी पैसे से यदि सरकार व सरकार के नुमाइंदे जनपद चंदौली में एक कोल्ड स्टोरेज की स्थापना कर देते तो स्थानीय किसानों के लिए यह एक बड़ी मदद होती। किसान यहां शिमला मिर्च, हरी सब्जियां आदि की बेहतर पैदावार करने की दक्षता व क्षमता रखते हैं, लेकिन कोल्ड स्टोरेज होने के अभाव में वह बड़े पैमाने पर इन सब्जियों की खेती करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। यदि ऐसा होता तो आज जनपद में सब्जियों के दाम जो आसमान छू रहे हैं, महंगाई ने मध्यम व गरीब वर्ग के रसोईघर का बजट बिगाड़ रखा है। यदि कोल्ड स्टोरेज की स्थापना का सपना पूरा हो गया होता तो जनपद में महंगाई इस कदर आमजन को परेशान नहीं करती। कहा कि जनपद में खेती-किसानी को बढ़ावा देने व किसानों की आय को सही मायने में बढ़ाने के लिए संसाधन व सुविधाएं विकसित करनी होंगी। यहां कोल्ड स्टोरेज की स्थापना किसान हित में है। साथ ही बीएससी एग्रीकल्चर व एमएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई के महाविद्यालय की स्थापना आवश्यक है, ताकि युवा पढ़-लिखकर खेती-किसानी में आधुनिक संसाधनों व उन्नतशील बीजों का प्रयोग कर बेहतर पैदावार से अच्छी आय अर्जित कर जनपद का नाम रौशन करने के साथ ही अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर और सुदृढ़ बना सके।

 

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