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Chandauli News : आखिर अपने ही संसदीय क्षेत्र में जिलाध्यक्ष की घोषणा क्यों नहीं कर पा रहे प्रदेश चुनाव अधिकारी डॉ महेंद्रनाथ पांडेय

चंदौली। बीजेपी की प्रदेश में चल रही संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया के बीच चंदौली जिले में नए जिलाध्यक्ष की घोषणा अब भी अधर में लटकी हुई है। खास बात यह है कि इस घोषणा में देरी तब हो रही है जब संगठनात्मक चुनाव के प्रभारी स्वयं जिले के पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय हैं। 26 नवंबर को राज्य के 14 जिलों के नए जिलाध्यक्षों की सूची जारी होने के बाद से ही चंदौली की भी चर्चाएं तेज हो गई थीं, लेकिन अब तक किसी नाम पर मुहर नहीं लग सकी है। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे कि आखिर क्या वजह है कि प्रदेश चुनाव प्रभारी अपने ही संसदीय क्षेत्र में जिलाध्यक्ष की घोषणा नहीं कर पा रहे हैं।

 

चुनाव प्रक्रिया विधानसभा उपचुनाव के तुरंत बाद शुरू हुई थी। इसी दौरान प्रदेश नेतृत्व ने कई जिलों में नए चेहरे चुनकर संगठन को नई दिशा देने का प्रयास किया। वाराणसी महानगर सहित कई महत्वपूर्ण जिलों के जिलाध्यक्षों की घोषणा की जा चुकी है। सूत्र बताते हैं कि इसी चरण में चंदौली का नाम भी शामिल था और पहली सूची में ही यहां के नए जिलाध्यक्ष के नाम का ऐलान होना था।

 

स्थानीय स्तर पर चर्चा थी कि पूर्व सांसद के बेहद करीबी और पूर्व जिला अध्यक्ष रहे एक नेता को फिर से जिलाध्यक्ष बनाए जाने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। संगठन के भीतर भी माना जा रहा था कि उनका नाम लगभग तय है और उन्हें दोबारा जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। लेकिन अंतिम समय में परिस्थितियां बदल गईं। उनकी उम्र को लेकर सवाल खड़े होने के साथ ही संगठन में विरोध भी सामने आ गया था।

 

कई कार्यकर्ताओं ने यह भी संकेत दिया कि जिले में नए और सक्रिय चेहरे को नेतृत्व देना अधिक लाभकारी होगा। इसी बीच प्रदेश संगठन स्तर से यह संदेश आया कि घोषणा को कुछ समय के लिए टाल दिया जाए। इसके बाद आनन-फानन में बैठक स्थगित कर दी गई और सूची जारी नहीं हो सकी। पूर्व सांसद अभी भी चंदौली को अपना राजनीतिक कार्यक्षेत्र बनाए हुए हैं। जिलाध्यक्ष की घोषणा के साथ विरोध के स्वर न मुखर होने लगें इसलिए भी काफी फूंक फूंककर कदम रख रहे हैं।

 

चंदौली में जिलाध्यक्ष पद को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। कार्यकर्ताओं में भी उत्सुकता बढ़ती जा रही है कि आखिर किस नाम पर प्रदेश नेतृत्व सहमति बनाएगा। वहीं जिले में यह भी चर्चा है कि अंतिम निर्णय प्रदेश नेतृत्व के स्तर पर लंबी मंथन प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल, जिले में भाजपा की कमान काशीनाथ सिंह के हाथों में है। काशीनाथ सिंह रक्षामंत्री के करीबी माने जाते हैं, इसलिए जिलाध्यक्ष पद पर उनकी ताजपोशी हुई थी।

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