
चंदौली। भागदौड़ और स्वार्थ से भरे इस दौर में जहां अधिकांश लोग अपने निजी हितों तक सीमित होते जा रहे हैं, वहीं चकिया नगर निवासी प्रदीप उपाध्याय इंसानियत और करुणा की एक अनोखी मिसाल पेश कर रहे हैं। वह कई वर्षों से अपने जीवन का एक हिस्सा बेजुबान बंदरों और लंगूरों के बीच बिताते आ रहे हैं।
प्रदीप उपाध्याय न केवल इनके बीच समय बिताते हैं, बल्कि नियमित रूप से इनके लिए भोजन और पानी की भी व्यवस्था करते हैं। सुबह और शाम का उनका एक तय समय होता है, जब वह इन बेजुबान जीवों के बीच पहुंचकर उन्हें फल, बिस्किट व अन्य खाद्य सामग्री खिलाते हैं। उनके इस कार्य से न केवल पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम का संदेश मिलता है, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और करुणा की भावना भी मजबूत होती है।
प्रदीप का मानना है कि आज का मानव तेजी से स्वार्थ की ओर बढ़ता जा रहा है और प्रकृति व जीव-जंतुओं से उसका जुड़ाव कम होता जा रहा है। इस विषय पर उन्होंने कहा कि आज का इंसान भागदौड़ भरी जिंदगी में इतना उलझ गया है कि उसे अपने अलावा किसी और की चिंता नहीं रह गई है लेकिन यह बेजुबान जीव भी हमारी ही तरह इस धरती के हिस्सेदार हैं। इनके बीच समय बिताने से मन को शांति मिलती है और इंसान को अपनी जिम्मेदारियों का अहसास भी होता है। उनकी यह पहल स्थानीय लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। कई लोग अब उनके इस प्रयास से प्रभावित होकर पशु-पक्षियों के प्रति दया और सहयोग की भावना अपनाने लगे हैं।
समाज में बढ़ती संवेदनहीनता के बीच प्रदीप का यह मानवीय प्रयास यह संदेश देता है कि यदि हर व्यक्ति थोड़ा-सा समय और संवेदना बेजुबान जीवों के लिए दे दे, तो इंसानियत की असली पहचान और भी मजबूत हो सकती है।

