
लेखक: डॉ. विनय प्रकाश तिवारी, SEBI पंजीकृत निवेश सलाहकार एवं फाउंडर – Daddy’s International School, विशुनपुरा कांटा (चंदौली, यूपी)
उत्तर प्रदेश सरकार ने आज ही 2026‑27 का बजट प्रस्तुत किया। बजट में बड़े‑बड़े आंकड़ों की बौछार है—लाखों करोड़ रुपये की योजनाएँ, हजारों करोड़ के प्रावधान। एक आम नागरिक और लघु निवेशक के रूप में मैं इस बजट को कैसे समझूँ? इस लेख में मैं अपने विचार और भावनाएँ साझा करता हूं।
बुनियादी ज़रूरतें और विकास
सबसे पहले, बजट का कुल आकार ₹9.12 लाख करोड़ है। यह सुनकर किसी भी आम नागरिक के मन में सवाल उठता है: क्या यह पैसा हमारी रोजमर्रा की ज़िंदगी में फर्क ला पाएगा? ग्रामीण घरों तक नल लगाने के लिए ₹22,676 करोड़ का प्रावधान किया गया है। पानी हर घर पहुँचे, यह सपना हर गाँववासी देखता है। इसी तरह पंचायत भवन, डिजिटल लाइब्रेरी और ग्रामीण स्टेडियम जैसी सुविधाओं के लिए ₹32,090 करोड़ रखे गये हैं। सड़कों और सेतुओं के निर्माण व चौड़ीकरण के लिए ₹34,468 करोड़—ये आँकड़े पढ़ कर मन में उम्मीद की किरण जागती है कि शायद अब मेरे गाँव की सड़कें भी पक्की होंगी।
किसानों की आशाएं
किसानों के लिए ₹10,888 करोड़ की कृषि योजनाएँ और सिंचाई व जल संसाधनों के लिए ₹18,290 करोड़ की व्यवस्था की गयी है। गन्ना और अनाज के उत्पादन लक्ष्य भी बहुत बड़े हैं। पर एक किसान का बेटा होने के नाते मैं जानता हूँ कि सिंचाई के प्रोजेक्ट अक्सर सालों खिंचते हैं। मेरा मन इस उम्मीद और चिंता के बीच झूलता रहता है कि क्या यह धन वाकई खेतों तक पानी पहुँचा पाएगा? फिर भी, डीबीटी के माध्यम से 94,668 करोड़ रुपये किसानों के खातों में पहुँचना सुकून देता है—कम से कम पैसा सीधे हाथ में आएगा।
युवाओं के सपने
शिक्षा और कौशल में निवेश हर प्रदेश के भविष्य को संवारता है। बजट में मेडिकल शिक्षा पर ₹14,997 करोड़ का प्रावधान और स्वास्थ्य बजट में 37,956 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दिखाई गई है। साथ ही, पांच वर्षों में 9.25 लाख युवाओं को ट्रेनिंग और 4.22 लाख को रोजगार मिलने का दावा है। एक शिक्षक और निवेश सलाहकार के रूप में मुझे यह कदम सराहनीय लगता है, क्योंकि नौजवानों को रोज़गार मिलना ही समाज का भविष्य तय करेगा। “डिजिटल यूपी” के तहत 49 लाख से ज्यादा टैबलेट/स्मार्टफोन बांटने की बात सुनकर लगता है कि शिक्षा अब सचमुच हाथों में आ रही है।
महिलाओं और समाज के लिए
मिशन शक्ति के तहत बीसी सखी योजना, जिसमें 39,880 महिलाएँ सक्रिय हैं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाती है। कई स्वयं सहायता समूहों ने 39,000 करोड़ से अधिक का लेन‑देन किया है—यह डेटा दिल को उत्साह से भर देता है। लेकिन एक पिता होने के नाते मैं सोचता हूँ कि महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन के लिए जिन योजनाओं की बात होती है, उनकी जमीन पर क्रियान्विति उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
रोजगार और उद्योग
प्राइवेट नौकरी पाने वालों के लिए बजट में कोई सीधा लाभ नहीं दिखता। हाँ, उद्योग एवं अधोसंरचना विकास के लिए ₹27,103 करोड़, MSME सेक्टर के लिए ₹3,822 करोड़ और आईटी/इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए ₹2,059 करोड़ रखना भविष्य की नौकरियों के बीज बो सकता है। 2.19 लाख से अधिक पुलिस पदों पर भर्ती और युवाओं को प्रशिक्षण/काउंसिलिंग देने की योजनाएँ बेरोज़गार युवाओं की उम्मीदें बढ़ाती हैं। फिर भी, एक निवेशक के रूप में मैं महसूस करता हूँ कि स्थायी रोजगार सृजन के लिए हमें जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी योजनाएँ और तेज़ अमल चाहिए।
एक आम नागरिक की उलझन
बजट भाषण सुनते हुए मेरे मन में कई भाव उठते हैं -उम्मीद, चिंता, उत्साह और संशय। बजट में इतने बड़े‑बड़े आंकड़े सुनकर गर्व भी होता है कि मेरा प्रदेश आगे बढ़ रहा है, और डर भी कि कहीं यह सब कागजों तक ही न रह जाए। बतौर सेबी पंजीकृत निवेश सलाहकार मैं जानता हूँ कि नीति का अमल ही असली लाभ देता है। एक गाँव के स्कूल के संस्थापक के रूप में मैं यह भी देख रहा हूँ कि शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास में निवेश सही दिशा में है।
अंततः, मुझे लगता है कि आम आदमी को इस बजट से उम्मीद करनी चाहिए, पर आँख मूँदकर नहीं। हमें अपने आस‑पास होने वाले विकास पर नज़र रखनी होगी, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना होगा और जब ज़रूरत हो, जिम्मेदार नागरिक के रूप में सवाल भी पूछने होंगे। जब हम जागरूक रहेंगे, तभी ये आँकड़े जमीन पर उतर कर हमारी ज़िंदगी को बेहतर बना पाएंगे।

