
संवाददाता – बाबू चौहान
चंदौली। जिले में धान खरीद व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सभी क्रय केंद्रों के पोर्टल बंद होने से किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। रोजाना सैकड़ों किसान अपनी उपज लेकर केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन ऑनलाइन पोर्टल बंद होने के कारण खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही। निराश किसान बिना धान बेचे ही वापस लौटने को मजबूर हैं। किसानों ने प्रशासन को व्यवस्था सुधारने के लिए चार दिन का समय दिया है। यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कलेक्ट्रेट के घेराव की चेतावनी दी।
किसान विकास मंच और किसान मजदूर संयुक्त यूनियन के संयुक्त प्रदर्शन के बाद 9 फरवरी को डिप्टी आरएमओ राघवेन्द्र सिंह ने आश्वासन दिया था कि धान खरीद दोबारा शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा था कि जिन किसानों की पोर्टल फीडिंग नहीं हो पाई है, उनकी प्रविष्टि सुनिश्चित कराई जाएगी। इसके लिए 12 फरवरी तक पोर्टल खुलवाने की बात कही गई थी।
हालांकि, तय तिथि बीत जाने के बाद भी पोर्टल शुरू नहीं हो सका, जिससे किसानों में भारी नाराजगी फैल गई है। किसान नेताओं का कहना है कि बार-बार आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नजर नहीं आ रहा। खाद्य एवं रसद विभाग के सूत्रों के मुताबिक, धान खरीद से जुड़ी इस समस्या पर 12 फरवरी को शाम चार बजे लखनऊ में उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है। अधिकारियों का दावा है कि बैठक के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। मगर किसानों का कहना है कि बैठकों और आश्वासनों से अब उनका भरोसा उठता जा रहा है।
इसी मुद्दे पर किसान विकास मंच के कार्यकर्ताओं ने भिटिया शिव मंदिर प्रांगण स्थित एक मैरिज हाउस में आपात बैठक की। बैठक में सरकार और प्रशासन के रवैये पर तीखा विरोध जताया गया। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि चार दिन के भीतर धान खरीद पोर्टल नहीं खोला गया और शेष धान की खरीद सुनिश्चित नहीं की गई, तो किसान विकास मंच के बैनर तले व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।
कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया जाएगा। बैठक के दौरान “किसान विरोधी नीतियां बंद करो” और “धान खरीद शुरू करो, किसानों को राहत दो” जैसे नारे लगाए गए। बैठक में जय नाथ सिंह, राम अवध सिंह, अवधेश कुमार, बिमलेश सिंह, भरत यादव, सरयू नाथ, बचाऊ यादव, सुरेश मौर्य, सुजीत सिंह, धीरेंद्र कुमार, रमेश पांडेय और इंद्रदेव सहित कई किसान नेता मौजूद रहे।

