
Term Insurance को लेकर चर्चा अक्सर तब शुरू होती है जब कोई अनहोनी हो जाती है। जबकि सच्चाई यह है कि यह बीमा घटना के बाद नहीं, घटना से पहले लिया जाने वाला फैसला है। लेकिन इससे पहले कि Return of Premium जैसे विकल्पों पर बात हो, यह समझना ज़रूरी है कि term insurance किसे लेना चाहिए और किसे नहीं। LTP Calculator Financial Technology Pvt. Ltd & Daddy’s International School & Hostel, Bishunpura Kanta, Chandauli, UP के Founder Dr. Vinay Prakash Tiwari टर्म इंश्यूरेंस के लाभ और बारीकियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
Term Insurance हर उस व्यक्ति को लेना चाहिए, जिसकी आय पर कोई और निर्भर है। नौकरीपेशा व्यक्ति, व्यवसायी, नवविवाहित दंपती, छोटे बच्चों के माता-पिता, या जिन पर home loan, business loan जैसी liabilities हैं—इन सबके लिए term insurance अनिवार्य सुरक्षा कवच है। खासकर 20 से 35 वर्ष की उम्र में लिया गया term insurance कम प्रीमियम में बड़ा कवर देता है और भविष्य की अनिश्चितताओं से परिवार को बचाता है।
वहीं दूसरी तरफ, जिन्हें term insurance लेने की ज़रूरत नहीं होती, वे लोग हैं जिन पर कोई आर्थिक रूप से निर्भर नहीं है, जिनके पास पहले से ही पर्याप्त corpus है जिससे परिवार आजीवन चल सकता है, या फिर जिनकी उम्र इतनी अधिक हो चुकी है कि प्रीमियम बहुत ज़्यादा और coverage कम हो जाता है। ऐसे मामलों में term insurance एक भावनात्मक निर्णय बन सकता है, व्यावहारिक नहीं।
अब एक और शब्द आता है जो term insurance के साथ अक्सर जोड़ा जाता है—Rider। Rider दरअसल मूल policy के साथ जुड़ने वाला एक अतिरिक्त सुरक्षा लाभ होता है, जिसके लिए अलग से थोड़ा premium देना पड़ता है। Rider का काम policy को “better” बनाना है, न कि उसे “complex”।
सोच-समझकर करें चयन
वास्तव में, term insurance के साथ जिन riders पर विचार किया जाना चाहिए, वे बहुत सीमित हैं। सबसे महत्वपूर्ण है Accidental Death Benefit Rider, जिसमें दुर्घटना से मृत्यु होने पर अतिरिक्त राशि मिलती है। दूसरा उपयोगी rider है Permanent Total Disability Rider, जिसमें किसी गंभीर दुर्घटना के बाद काम करने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाए तो financial support मिलता है। कुछ मामलों में Critical Illness Rider भी उपयोगी हो सकता है, लेकिन केवल तब, जब उसकी conditions स्पष्ट हों और coverage वास्तविक जरूरत से मेल खाता हो।
इसके विपरीत, ऐसे कई riders होते हैं जो सिर्फ brochure को आकर्षक बनाते हैं—जिनका practical उपयोग बहुत कम होता है। अनावश्यक riders policy को महँगा बना देते हैं और अक्सर claim के समय निराशा हाथ लगती है। इसलिए rule साफ है—कम riders, लेकिन सही riders।
अब यहीं से Return of Premium की बहस शुरू होती है। Term Insurance मूल रूप से एक शुद्ध सुरक्षा योजना है। इसका मकसद कम प्रीमियम में बड़े कवर के ज़रिए यह सुनिश्चित करना है कि पॉलिसीधारक की अनुपस्थिति में परिवार की आर्थिक ज़रूरतें प्रभावित न हों। इसमें न कोई maturity amount होता है और न ही निवेश जैसा कोई लाभ।
लेकिन जब Term Insurance के साथ Return of Premium (ROP) जोड़ा जाता है, तो तस्वीर बदल जाती है। ROP वाले प्लान में यह वादा किया जाता है कि यदि पॉलिसी की पूरी अवधि तक पॉलिसीधारक जीवित रहता है, तो उसे अब तक चुकाया गया base premium वापस कर दिया जाएगा। यह सुनने में आकर्षक लगता है, लेकिन यह कोई रिटर्न या मुनाफा नहीं है—यह सिर्फ आपका ही पैसा है, वह भी बिना किसी ब्याज के। GST, rider premium और अन्य शुल्क इसमें शामिल नहीं होते।
यहीं पर आम आदमी सबसे बड़ी गलती करता है। Premium वापस मिलने की भावना अच्छी लगती है, लेकिन इसकी कीमत महँगा प्रीमियम बनकर चुकानी पड़ती है। Insurance companies को ROP प्लान में दोहरी जिम्मेदारी निभानी होती है—मृत्यु हुई तो sum assured देना, और मृत्यु नहीं हुई तो premium लौटाना। इसी कारण ROP वाले term plans में प्रीमियम सामान्य term insurance की तुलना में 60 से 100 प्रतिशत तक अधिक हो जाता है।
जहाँ एक सामान्य term insurance में 1 करोड़ रुपये के कवर के लिए सालाना लगभग 10–12 हजार रुपये का प्रीमियम हो सकता है, वहीं उसी कवर का ROP प्लान 18–22 हजार रुपये तक पहुँच जाता है। यानी वर्षों तक ज़्यादा भुगतान, सिर्फ इस संतोष के लिए कि अंत में वही रकम वापस मिल जाएगी—बिना किसी growth के।
शिक्षा और financial literacy के क्षेत्र में काम करते हुए मेरा अनुभव साफ कहता है कि बीमा और निवेश को मिलाना अक्सर नुकसानदेह होता है। सुरक्षा के लिए insurance और संपत्ति निर्माण के लिए investment—दोनों की भूमिका अलग-अलग है। Return of Premium भावनात्मक सुकून दे सकता है, लेकिन वित्तीय समझदारी आज भी साधारण term insurance में ही है।
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